रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का 93वें शहीद दिवस एमआर कार्यालय में मनाया गया। कार्यालय में आयोजित शहीद दिवस के उपलक्ष्य में देश पर प्राण न्यौछावर करने वालों के विचारों को याद कर उन्हें नमन किया गया। कामरेड आईएल पुरोहित ने कहा कि भारत सैकड़ो साल से चली आ रही सांप्रदायिकता की समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए धर्म को राजनीति से अलग करना चाहिए। सभा को जनवादी लेखक मंच के रणजीत सिंह और वरिष्ठ कामरेड एमएल नागावत ने भी सम्बोधित किया।
शहीद भगत सिंह के विचार ओर वर्तमान में उनकी प्रासनिकता संगोष्ठी में प्रादेशिक उपाध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इस बात की आवश्यकता है कि सभी मेहनतकश,किसान,मजदूर और सर्वहारा वर्ग संगठित होकर संघर्ष करे। श्रमिकों के लिए चार काली श्रम संहिताओं को लाकर अंग्रेजों से लड़कर जो श्रम कानून हासिल किए थे उन्हें खत्म कर अंग्रेजों से भी ज्यादा कठोर श्रम संहिताएं थोपी जा रही हैं। जिसके चलते वेतन, भत्ते, छुट्टियां,पेंशन, प्रोविडेंट फंड, बीमा यूनियन बनाने के अधिकार, यूनियन के पंजीयन को बनाए रखने के नियम तथा हड़ताल करने के संवैधानिक अधिकार को ही खत्म किया जा रहा है। जिन दवा प्रतिनिधियों ने लंबे संघर्ष के बाद सेल्स प्रमोशन एम्पलाइज एक्ट हासिल किया था, जिसके कारण उन्हें वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट मिनिमम वेजेस एक्ट, मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट,पेमेंट आफ बोनस एक्ट,पेमेंट आफ ग्रेच्युटी एक्ट आदि जैसे श्रम कानून का लाभ प्राप्त था श्रम संहिताओं के लागू होते ही इन सभी श्रम कानून के लाभ से वंचित हो जाएंगे। इस केंद्र सरकार द्वारा इन श्रम संहिताओं में अवकाश लाभ में भी कटौतियां की गई सवैतनिक अवकाश की सीमा 180 से घटकर 90 दिन कर दी गई है। इसका लाभ भी वास्तविक वेतन की जगह गत 12 माह की औसत वेतन के आधार पर दिया जाएगा। नौकरी छोड़ने की दशा में यह 120 दिन की जगह मात्र 30 दिन का कर दिया गया है। सभी चार संहिताओं में अस्पष्टता के कारण नियोक्ताओं को इन कानून के उल्लंघन का असीमित अवसर मिलता है। एकजुट होकर संघर्ष करें एवं भगत सिंह के विचारों को साकार कर नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। सभा को एमपी एमएसआर यूनियन अध्यक्ष अभिषेक जैन ने भी संबोधित किया।
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