रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम जिले के झाबुआ, मंदसौर और उज्जैन संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों की जीत का जश्न रतलाम मुख्यालय पर धूमधाम से मनाया गया। कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप सहित पार्टी पदाधिकारियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय को मुंह मीठा कर बधाई दी। ढोल-ढमाकों के साथ मतगणना स्थल से भाजपा कार्यालय पहुंचे मंत्री काश्यप ने जिलाध्यक्ष उपाध्याय सहित अन्य पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का मुंह मीठा कराया। इस दौरान जिलाध्यक्ष उपाध्याय ने भी मंत्री काश्यप को मिठाई खिलाई। इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ प्रवीण सोनी, पवन सोमानी, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष विपल्व जैन, विनोद करमचंदानी सहित अन्य पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे।
मंगलवार सुबह साइंस एंड आर्ट्स कॉलेज में मतगणना स्थल पर भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच मतों की गिनती शुरू हुई। रतलाम जिले में रतलाम-झाबुआ, मंदसौर सहित उज्जैन संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशियों के समर्थक मतगणना स्थल पर तैनात दिखाई दिए। शाम 6 बजे तक की आए परिणाम के मुताबिक रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र की भाजपा प्रत्याशी अनीता चौहान प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया से 2 लाख 8 हजार 692 मतों से आगे रही। उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अनिल फिरोजिया 3 लाख 16 हजार 616 मतों से बढ़त बनाए हुए हैं। इसके अलावा रतलाम जिले में जावरा-मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी 4 लाख 45 हजार 588 मतों से आगे हैं। बता दें कि रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट पर कुल 12 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। रतलाम जिले की एकमात्र सैलाना विधानसभा से कांग्रेस को बढ़त मिली है, शेष विधानसभाओं से कांग्रेस का सुपड़ा साफ देखा गया है।
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र का इतिहास
पहले झाबुआ और वर्तमान में रतलाम लोकसभा सीट पर 1957 से 2019 तक हुए 16 चुनाव व एक उपचुनाव में कांग्रेस का एक छत्र राज रहा है। भाजपा ने 2014 में पहली बार इस आदिवासी सीट पर कमल खिलाया था, लेकिन निर्वाचित सांसद दिलीप सिंह भूरिया के निधन के बाद उपचुनाव में कांग्रेस ने फिर से यह सीट भाजपा से छीनकर अपने कब्जे में ले ली थी। संसदीय क्षेत्र में दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस से पांच बार, भाजपा से एक बार सांसद चुने गए, वहीं कांतिलाल भूरिया कांग्रेस से पांच बार सांसद निर्वाचित हुए। 2014 के चुनाव में नमो लहर में जरूर भाजपा ने कांग्रेस का गढ़ ढहाते हुए सफलता का झंडा गाड़ा, लेकिन यह भी भाजपा के निर्वाचित सांसद दिलीपसिंह भूरिया के निधन से ज्यादा दिन टिक नहीं पाया था। इसके बाद मोदी लहर के चलते गुमान सिंह डामोर ने 2019 में यहां से भाजपा को विजय दिलाई थी। गुमानसिंह डामोर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल के चलते अबकी बार पार्टी ने उन्हें दरकिनार करते हुए मध्य प्रदेश वनमंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी और जिला पंचायत अध्यक्ष अनीता चौहान को टिकट देकर मैदान में उतारकर जीत अपने कब्जे में हासिल कर ली।
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