असीमराज पांडेय, रतलाम। दिल्ली में तीस हजारी थाना एक क्षेत्र है, चूंकि थाना अंतर्गत ही जिला न्यायालय भी आता है तो उसकी पहचान तीस हजारी कोर्ट के नाम से थाने से ज्यादा मशहूर है। यह सब हम इसलिए बता रहे हैं कि रतलाम के प्रमुख पुलिस स्टेशन के अंदर इन दिनों तीस हजारी की चर्चा जोरों पर हैं। दरअसल वाक्या कुछ ऐसा है कि कुछ दिनों पहले रतलाम जिला अस्पताल में एक दंगल काफी सुर्खियां बंटोर चुका है। मीडिया में खाकी की किरकिरी के बाद दंगल के पहलवानों की सीसीटीवी फूटेज से पहचान के साथ खातीरदारी का उच्चस्तर से फरमान जारी हुआ। दंगल के पहलवानों को थाने पर पेश कराने की दलाली में एक रूस्तम ने भी दांव-पेंच मारे और थाने के एक फीतीधारी को खातीरदारी नहीं करने के नाम पर 30 हजार रुपए दिए। फीतीधारी ने 30 हजार रुपए लेकर आश्वस्त किया कि बेफ्रिक रहो। रूस्तम (दलाल) के इशारे पर अस्पताल में दंगल करने वाले पहलवान आश्वस्त होकर पहुंचे कि थाने में उनकी खातीरदारी नहीं होगी। थाने पहुंचते ही दंगल करने वाले पहलवानों को आश्वासन के उल्टे पूरजोर तरीके से खातीरदारी हुई। ये अंदर की बात है… कि रूस्तम (दलाल) ने जिस फीतीधारी को 30 हजार रुपए दिए थे तो उसने सवाल किया कि रुपए भी ले लिए और खातीरदारी भी करवा दी। फीतीधारी ने रूस्तम (दलाल) को जवाब दिया कि मैं नहीं मारूंगा उस बात के रुपए थे। पूछ लो अपने पहलवानों से किसी को मैंने हाथ भी लगाया। सवाल यह है कि फिर बदमाशों में खाकी का खौफ कैसे आएगा ?
बकरे की टूटी टांग, थाने में मचाया बवाल
रतलाम के सूरजपोर क्षेत्र में पिछले सप्ताह पहले ऑटो से बकरे की टांग टूट गई। टांग टूटे बकरे के मालिक ने ऑटो चालक की धुनाई लगा दी। दोनों पक्षों से नेतागिरी करने वालों की भीड़ जमा होकर थाने पहुंचकर बवाल में तब्दिल हो गई। यहां पर पुलिस वालों ने एक संगठन विशेष को करीब पौन घंटे तक तवज्जों नहीं दी। संगठन विशेष को बकरे की टूटी टांग के मामले में हमारी सरकार है … तक का हवाला देना पड़ा। इस दौरान थाने के कर्मचारियों ने भाव दिए बिना चैनल अंदर से बंद कर दिया। खिसयाए संगठन के लोग एक-दूसरे का मुंह ताकते रहे और खाकी के अधिकारी से चर्चा के लिए मोबाइल फोन घनघना शुरू किए। दूसरा पक्ष पूरा मांजरा बड़ी दिलचस्पी से थाने में बैठ देखता रहा। परिवार के साथ बैठे वरिष्ठ अधिकारी भी संगठन के विशेषों के मोबाइल पर बाते सुन मंद-मंद मुस्कराए। बकरे की टूटी टांग को लेकर खाकी विभाग के एक अधिकारी ने यहां तक कह दिया कि कोई बात नहीं 5 हजार रुपए मुझसे लेकर बकरे वालों को दे देना। कल मेरे ऑफिस आकर पांच हजार रुपए ले जाना। खाकी के इस अधिकारी ने बिना कुछ बोले वह सबकुछ बोल दिया कि चलो अभी शांत रहो। ये अंदर की बात है… महकमें में चर्चा इसलिए खास है कि नुकसान की भरपाई करने वाले अपनी झांकी दिखाने के लिए प्रदेश में हमारी सरकार के बड़े-बड़े दावे तो भरे, लेकिन पांच हजार रुपए लेने साहब के पास आए।
मन को हरने वाले की डॉल्फिन में उछल-कूंद
सैलाना रोड स्थित विवादों से जुड़ा रहने वाला एक स्वीमिंग पूल की पैरवीकर्ता फूलछाप पार्टी के एक सेठ (मन को हरने वाले) अब बेनकाब हो गए। शहर माननीय के अलावा पार्टी के पदाधिकारी के साथ रहवासी जान चुके कि अवैध स्वीमिंग पूल के संचालनकर्ता को आखिर कौन संरक्षण दे रहा था। वाक्या कुछ ऐसा है कि पिछले माह पूल संचालनकर्ता की लापरवाही से युवक की मौत हुई। उक्त पूल का पहले से विवादों में रहने का प्रमुख कारण अवैध निर्माण और अनुमति बगैर संचालित होना है। सरकारी मशीनरी पर उक्त पूल के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बीच में आने वाले शहर माननीय के करीबी जो कि सेठ के उपनाम से पहचान रखते हैं उनका संरक्षण था। ये अंदर की बात है… कि उक्त सेठ ने अवैध पूल में डॉल्फिन की तरह खूब उछल-कूंद भी की है। इसी के चलते पूल के संचालनकर्ता को सेठ अरसे से संरक्षण देकर उसे बचाते रहे। पिछले दिनों शहर माननीय से रहवासियों की भेंट ने सेठ की दखलअंदाजी से पर्दा उठाया। शहर माननीय ने मसले पर ऐसी कमान संभाली कि स्वीमिंग पूल संचालनकर्ता के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हो गई। अब आचार संहिता भी खत्म हो चुकी है, ऐसे में जिला व निगम प्रशासन भी उक्त पूल को निशाने पर लेगा। यह तय है कि आने वाले दिनों में अवैध स्वीमिंग पूल पर वह सब देखने को मिलेगा जो नियम के खिलाफ होता है। ऐसे में सवाल है कि मन को हरने वाले ने आखिर एक व्यक्ति के चलते सभी का मन क्यों दुखाया?
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