रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम की धानमंडी में कभी एक खुशहाल घर बसता था, जहां रतनबाई पाटीदार अपने पति और बेटों के साथ सुकून की जिंदगी जीती थीं। करोड़ों की सम्पत्ति, घर, दुकानें, सोने के आभूषण—किसी चीज की कमी नहीं थी। लेकिन आज वही रतनबाई, जिनकी ममता से बेटों ने जीवन पाया, 92 साल की उम्र में दो वक्त की रोटी और इलाज के लिए मोहताज हैं।
जिस मां ने उम्रभर अपने बच्चों की परवरिश की, वही आज अपनों के हाथों ही लूटी गई। रतनबाई का दर्द तब छलक पड़ा जब उन्होंने जनसुनवाई में कलेक्टर के नाम एक गुहार भरा पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि उनके बेटों नरेंद्र और नारायण पाटीदार ने बहुओं के साथ मिलकर धोखे से उनका अंगूठा लगवाकर करोड़ों की सम्पत्ति अपने नाम कर ली। यहां तक कि उनके पास जमा 20 लाख रुपये के आभूषण भी हथिया लिए, बिना कुछ बताए। सबकुछ लूट लेने के बाद, इन संतान रूपी सौदागरों ने मां को घर से भी निकाल फेंका। न रहने की जगह दी, न खाने का सहारा। न इलाज कराया, न देखभाल की। आज रतनबाई मजबूरी में पोते आशीष के साथ रह रही हैं, लेकिन वहां भी आर्थिक तंगी से हालात खराब हैं। वृद्धा की आवाज में अब न गुस्सा है, न शिकायत सिर्फ एक टूटी हुई आत्मा की कराह है, जो पूछती है: क्या मां होना अब अभिशाप बन गया है? रतनबाई ने प्रशासन से अपील की है कि उनके बेटों-बहुओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि किसी और मां को अपनों के हाथों लुटने का ऐसा दर्द न झेलना पड़े।
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