
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिला मुख्यालय पर कुत्तों के बाधियाकरण के नाम पर करोड़ो की लूट का मामला लोकायुक्त की जांच में सामने आया हैं। पिछले 4 वर्षों से जारी बेखौफ भ्रष्टाचार के इस खेल पर कांग्रेस पार्षद भावना हितेश पैमाल की शिकायत पर जांच के बाद लोकायुक्त ने कुत्तों के बधियाकरण मामले की जांच कर प्रतिवेदन बनाकर भोपाल मुख्यालय भेज दिया है। इसमें 2022 से 2024 के दौरान किए गए 1 करोड़ 73 लाख 78 हजार 4 रुपए के भुगतान को लेकर भ्रष्टाचार से अब संबंधित नोडल और जिम्मेदार कटघरे में खड़े हो चुके हैं। जल्द ही कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर राशि डकारने वालों के खिलाफ एफआईआर (FIR) हो सकती है।
रतलाम नगर निगम (Ratlam Municipal Corporation) ने 2022 से मई 2025 तक 33,630 कुत्तों के बधियाकरण करने पर 2 प्राइवेट फर्मों को लगभग 2.29 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। बावजूद रतलाम में लगातार डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे थे। इसे लेकर कांग्रेस पार्षद भावना हितेष पैमाल ने कुत्ता बधियाकरण में भ्रष्टाचार होने की शिकायत की थी, जिसकी लोकायुक्त जांच चल रही है। मामले में अब तक 2 फर्मों ने 24,114 कुत्तों को बधिया किया था। वह भी बधियाकरण किट की कीमत से कम दर पर। इसके चलते भुगतान में अधिकारियों और फर्मों की मिलीभगत की पूरी संभावना है। फिलहाल हेडक्वार्टर में संभागीय मुख्यालय के प्रतिवेदन का परीक्षण चल रहा है। इसमें पाई जाने वाली कमियों को दूर करके जांच को पुख्ता किया जाएगा। इसके बाद भोपाल हेडक्वार्टर के निर्देश पर संभागीय मुख्यालय द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रतलाम निगम ने बचने के लिए की लेटलतीफी
भ्रष्टाचार जैसा गंभीर मुद्दा होने के बाद भी रतलाम नगर निगम (Ratlam Municipal Corporation) के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। दरअसल संभागायुक्त ने कमिश्नर से अभिमत मांगा था कि कुत्ता बधियाकरण में भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, इस संबंध में पूरी रिपोर्ट बनाकर दें। एसआईआर का बहाना बनाकर कमिश्नर ने यह अभिमत समय पर नहीं भेजा। ऐसे में बिना कमिश्नर के अभिमत के ही लोकायुक्त को रिपोर्ट मुख्यालय भेजना पड़ी।
खेल किया ऐसे : खर्च 1600 रुपए, कम में कैसे कर दिया
दरअसल Ratlam Municipal Corporation ने 2022 से 2024 तक जिन 2 प्राइवेट फर्मों से 4 बार कुत्तों का बधियाकरण करवाया। इसके बदले 3 बार 786 रुपए जबकि एक बार 636 रुपए प्रति कुत्ते के मान से भुगतान किया गया। यही बात चौंकाने वाली है क्योंकि जानकारों के मुताबिक सामान्य बधियाकरण किट की औसत कीमत लगभग 845 रुपए हैं, जबकि सरकारी गाइड लाइन के हिसाब से पूरा खर्च लगभग 1600 रुपए आता है। फिर फर्मों ने इतनी कम कीमत पर बधियाकरण कैसे कर दिया। जबकि इसमें उन्हें कुत्तों को पकड़ना, बधिया करना, देखभाल करना, डॉक्टर की फीस आदि भी देना थी। लोकायुक्त अब इसी एंगल को खंगालने में जुटा है कि निगम ने वेरिफिकेशन करके भुगतान किया या बिना वेरिफिकेशन के।
जांच के लिए और समय मांगा है
जांच प्रतिवेदन भोपाल मुख्यालय भेज दिया है। वहां से जैसे निर्देश आएंगे, उसके अनुसार आगे कार्रवाई करेंगे। रतलाम निगम का प्रतिवेदन रिपोर्ट भेजने के बाद आया। फिलहाल जांच के लिए और समय मांगा है। -राजेंद्र वर्मा, टीआई लोकायुक्त
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