
भोपाल, वंदेमातरम् न्यूज। मध्यप्रदेश शासन के मंत्री चेतन्य काश्यप (Minister Chaitanya Kashyap) ने केंद्र सरकार द्वारा फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ (Ghoosakhor pandat) के टीज़र और उससे जुड़े सभी आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज में असहमति, नफरत और दुर्भावना फैलाने वाले किसी भी प्रयास के खिलाफ केंद्र सरकार की सख्त और स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मंत्री काश्यप (Minister Chaitanya Kashyap) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने तत्परता दिखाते हुए नेटफ्लिक्स को यह आदेश जारी किया, क्योंकि संबंधित फिल्म (Ghoosakhor pandat) ब्राह्मण समाज सहित किसी भी समाज के प्रति नकारात्मक और भड़काऊ भावनाएं उत्पन्न कर सकती थी। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को अपमानित करने वाला कंटेंट स्वीकार्य नहीं है।
भाजपा समाज की एकता और शांति के साथ खड़ी
मंत्री चेतन्य काश्यप (Minister Chaitanya Kashyap) ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हमेशा संवेदनशील रही है और समाज में एकता, शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मत है कि समाज के किसी भी वर्ग के खिलाफ अपमानजनक, भड़काऊ या विभाजनकारी कंटेंट को सख्ती से नकारा जाएगा और उसकी कड़ी निंदा की जाएगी।
नफरत और भेदभाव वालों के खिलाफ सख्त रुख
मंत्री काश्यप (Minister Chaitanya Kashyap) ने कहा कि इस फैसले से यह साफ संदेश जाता है कि केंद्र सरकार समाज को विभाजित करने वाली नफरत और भेदभाव को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस निर्णय को समाजहित में एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीतियाँ हमेशा सशक्त और दृढ़ रही हैं। मंत्री काश्यप (Minister Chaitanya Kashyap) ने कहा कि समाज के हर वर्ग के लिए समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में केंद्र व प्रदेश सरकार के प्रयास लगातार प्रभावी और परिणामकारी रहेंगे।
एक्टर मनोज वाजपेयी पर केस दर्ज
एक्टर मनोज वाजपेयी की -अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ (Ghoosakhor pandat) विवादों में है। लखनऊ पुलिस ने इस फिल्म के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह केस फिल्म द्वारा जातीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने के प्रयासों के आरोपों के बाद दर्ज किया। पुलिस के मुताबिक फिल्म का शीर्षक और संवाद जानबूझकर एक विशिष्ट समुदाय को अपमानित करने के लिए चुने गए हैं। इसी बीच, मनोज वाजपेयी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि निर्माताओं ने विवादित प्रचार सामग्री हटाने का निर्णय लिया है। इस फिल्म में वह भ्रष्ट पुलिस ऑफिसर बने हैं। फिल्म को रितेश शाह ने डायरेक्ट किया है। फिल्म के लेखक नीरज ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि ‘पंडत’ (Ghoosakhor pandat) शब्द का इस्तेमाल सिर्फ फिक्शनल कैरेक्टर के लिए बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
नेटफ्लिक्स और सोशल मीडिया पर फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ (Ghoosakhor pandat) का टीजर जारी हुआ था। इसके शीर्षक ‘पंडत’ के साथ ‘घूसखोर’ शब्द जोड़ना पहली नजर में ही आपत्तिजनक पाया गया। इस कंटेंट के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। उधर, ‘पंडित’ (Ghoosakhor pandat) शब्द को नकारात्मक तरीके से पेश करने के बाद ब्राह्मण समाज देश के विभिन्न प्रांतों में सड़कों पर उतर अपना विरोध दर्ज करवा चुका है।
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