
असीम राज पांडेय, रतलाम। जिला मुख्यालय के एक नामी व्यवसायिक थाने की खाकी इन दिनों कानून-व्यवस्था छोड़कर “उगाही व्यवस्था” को मजबूत करने में जुटी हुई है। मामला सीधा-सादा नहीं, बल्कि क्रिकेट सट्टे के उन चौके-छक्कों से जुड़ा है, जिनकी गूंज अब थाने की चारदीवारी में सुनाई दे रही है।कहानी यूं है कि एक कुख्यात ऑनलाइन क्रिकेट बुकी ने अपनी सट्टे की आईडी दो सटोरियों को सौंप दी। दोनों सटोरियों ने आईडी पर ऐसा बल्ला घुमाया कि ढाई करोड़ रुपये की कमाई कर डाली। लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ, जब बुकी साहब ने उसी आईडी के सहारे सट्टे पर अपना दांव लगाकर पूरी राशि हजम कर ली। अब ढाई करोड़ डूबते देख दोनों सटोरिये खिसयानी बिल्ली बन गए। सीधे कानून का दरवाजा खटखटाने के लिए बकायदा आवेदन लिखकर थाने पहुंचे और साथ ही थाने के मुखिया को “मुंह बोले दाम” देने का प्रस्ताव भी रख दिया। लालच का स्वाद ऐसा चढ़ा कि मुखिया ने हामी भर दी। इसके बाद तो पूरा थाना अपराध रोकने की जगह सट्टे की राशि वसूलने में लग गया। कुख्यात सटोरिया हाथ नहीं आया, लेकिन उसके बड़े भाई जो सराफा बाजार में नामचीन हैं, उसे सम्मानपूर्वक थाने बुलाया गया। चाय-नाश्ता हुआ, मान-मनौव्वल चली, बस ढाई करोड़ का हिसाब साफ कराने की कोशिश बाकी रह गई। ये अंदर की बात है… (This is an inside story) कि खाकी का काम अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना होता है, लेकिन रतलाम के इस व्यवसायिक थाने की खाकी इन दिनों सट्टे की रकम उगाने में ही पूरी तरह व्यस्त नजर आ रही है।
निगम बना ऐसा गुरुकुल जहां शार्गिद भी नहीं पीछे
रतलाम नगर निगम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विकास के लिए नहीं, बल्कि कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर सवा दो करोड़ रुपये से ज्यादा की “नसबंदी” करने के लिए। फर्क सिर्फ इतना है कि नसबंदी कुत्तों की नहीं, सरकारी खजाने की हुई। मामला चार साल पुराना, यानी 2022 का है, जब सड़क और निर्माण कार्यों में कमीशन कला के लिए मशहूर एक उपयंत्री को कुत्तों के बधियाकरण का नोडल अधिकारी बना दिया गया। साहब ने मौका देखा और एजेंसियों से सांठगांठ कर वही कारनामा दोहरा दिया, जो वे सड़क निर्माण में घटिया काम अक्सर करते आए हैं। फर्जी आंकड़े तैयार हुए, कागजों में हजारों कुत्तों की नसबंदी कर दी गई और बिना किसी भौतिक सत्यापन के समय-समय पर भुगतान भी होता रहा। नतीजा सवा दो करोड़ रुपये से अधिक सरकारी खाते से गायब। संयोग देखिए कि यही उपयंत्री उस गुरु के शार्गिद बताए जाते हैं, जिनके चहेते निगम के नंबर-2 साहब कुछ समय पहले शासकीय जमीन की फर्जी रजिस्ट्री के मामले में काफी बेइज्जत हो चुके हैं । कहते हैं, जिस रास्ते पर गुरु चलता है, शार्गिद उसी पगडंडी पर दौड़ने को तैयार रहता है। अब जांच अंतिम दौर में है, रिपोर्ट राजधानी भेजी जा चुकी है और संकेत हैं कि जल्द ही इस उपयंत्री साहब के नाम भी संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज होगी। ये अंदर की बात है… (This is an inside story) कि तय माना जा रहा है कि गुरु की तरह शार्गिद भी मीडिया में फोटो छपवाने का सौभाग्य जल्द ही प्राप्त करेंगे।
रतलाम मॉडल ऑफ समाधान में सिर्फ होती समीक्षा
प्रदेश सरकार ने आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक कई प्लेटफॉर्म बनाए हैं, ताकि जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। लेकिन रतलाम के कुछ “मोटी चमड़ी” वाले अफसर सरकार की इस मंशा को जमीन पर उतरने ही नहीं दे रहे। निचले स्तर पर शिकायतें सुनी नहीं जातीं और जब मजबूर होकर शिकायत अपग्रेड होती है, तो या तो आंख मूंदकर उसे बंद कर दिया जाता है या फिर उसकी ग्रेड बदलकर जादूगरी दिखाई जाती है। जिले की मुखिया कई बार स्पष्ट निर्देश दे चुकी हैं कि शिकायतों का समाधान एल-1 स्तर पर ही किया जाए, लेकिन विभाग प्रमुखों पर इन निर्देशों का असर वैसा ही है, जैसा बारिश का रेगिस्तान पर। रतलाम की जनता आज भी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक भटक रही है, जबकि विभाग प्रमुख एसी चैंबर में बैठकर कमीशन वाली फाइलों पर गंभीर मंथन में लगे हैं। ये अंदर की बात है… (This is an inside story) कि जब तक जिला प्रशासन की मुखिया इन मोटी चमड़ी वाले अफसरों को सख्ती का पानी नहीं पिलाएंगी, तब तक शिकायतों की सुनवाई नहीं, सिर्फ समीक्षा ही होती रहेगी और समाधान मीडिया कार्यालय को भेजी जाने वाली प्रेस रिलीज और फोटो तक ही सिमटा रहेगा।
Website Design By
KAMAKSHI WEB
CONTACT : +91-9753910111


