
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम (Ratlam) जिले के जावरा नगरपालिका की पूर्व भ्रष्ट मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) नीता जैन और तत्कालीन लिपिक विजय सिंह शक्तावत को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया गया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत, रतलाम (Ratlam) के न्यायाधीश संजीव कटारे ने दोनों को चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास और दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। निर्णय के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
यह मामला 12 मार्च 2021 का है, जब उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने ठेकेदार की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सीएमओ कक्ष में ही रिश्वत लेते हुए आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा था।
‘पर्सनल कमीशन’ की मांग से खुला मामला
Ratlam के विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान के अनुसार, जावरा निवासी ठेकेदार पवन भावसार ने 9 मार्च 2021 को उज्जैन लोकायुक्त एसपी से शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने सहयोगी सुरेश प्रजापत के लाइसेंस पर जावरा नगरपालिका में तीन निर्माण कार्यों के ठेके लिए थे।
– वार्ड 14 में पेवर ब्लॉक (3.74 लाख रुपये)
– वार्ड 20 में आरसीसी नाली निर्माण (2.76 लाख रुपये)
– वार्ड 18 में आरसीसी रोड निर्माण (13.59 लाख रुपये)
कार्य पूर्ण होने के बाद 1.23 लाख रुपये की एफडीआर रिलीज कराने और 50 हजार रुपये के अंतिम बिल भुगतान के बदले तत्कालीन सीएमओ नीता जैन ने 3 प्रतिशत के हिसाब से 42 हजार रुपये ‘पर्सनल कमीशन’ की मांग की।
रिकॉर्डिंग बनी अहम साक्ष्य
शिकायत की पुष्टि के लिए उज्जैन लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव ने ठेकेदार को वॉइस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया। रिकॉर्डिंग में सीएमओ द्वारा अपने हिस्से की बात लिपिक शक्तावत के माध्यम से तय कराने का संकेत मिला। बाद में लिपिक विजय सिंह शक्तावत ने 2 प्रतिशत के हिसाब से 26 हजार रुपये की मांग की। मोलभाव के बाद 20 हजार रुपये तय हुए।
ट्रैप के दौरान रंगे हाथों गिरफ्तारी

अभियोजन साक्ष्य के अनुसार, जब ठेकेदार 15 हजार रुपये लेकर लिपिक के पास पहुंचा तो लिपिक सीएमओ के कक्ष में गया और लौटकर बताया कि “मैडम पूरे 20 हजार रुपये मांग रही हैं।” इसके बाद ठेकेदार ने 3,500 रुपये और जोड़कर कुल 18,500 रुपये दिए। लिपिक ने रकम अपनी जेब में रखी और सीएमओ के कक्ष में पहुंचा। तभी लोकायुक्त टीम ने दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। रिकॉर्डेड बातचीत और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने नीता जैन और विजय सिंह शक्तावत को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया।
नगरपालिका में ‘पीसी सिस्टम’ पर कानूनी नकेल
इस फैसले को नगरपालिका में प्रचलित कथित ‘पीसी सिस्टम’ (पर्सनल कमीशन) पर सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक विभिन्न स्तरों पर कमीशन तय रहता है, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ठेकेदारों के अनुसार, कुल राशि में से 18-20 प्रतिशत कमीशन, 18 प्रतिशत जीएसटी, 2.5 प्रतिशत ईपीएफ और 10-12 प्रतिशत ठेकेदार का लाभ निकालने के बाद लगभग 50 प्रतिशत राशि ही वास्तविक निर्माण कार्य के लिए बचती है। ऐसे में गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
फैसले से भ्रष्टाचार पर सख्ती का संदेश
रतलाम अदालत (Ratlam Court) के इस निर्णय को स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई से बचना संभव नहीं है।
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