
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम (Ratlam) सिटी के वार्ड नंबर 8 स्थित प्रोफेसर कॉलोनी और कोमल नगर के बीच वर्षों से चले आ रहे विवाद ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदौर हाईकोर्ट (Indore High Court) के आदेश के बावजूद कतिपय नेता द्वारा सार्वजनिक रास्ता फिर से बंद कर दिया गया, वह भी प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में। इसको लेकर मामला पुनः हाईकोर्ट में प्रस्तुत हो चुका है और संबंधितों को जल्द ही नोटिस जारी हो सकते हैं। कोर्ट में उक्त मामले के वीडियो और फोटो भी प्रस्तुत कर संबंधितों द्वारा स्वार्थ की राजनीति का उल्लेख किया गया है।

गौरतलब है कि इंदौर हाईकोर्ट (Indore High Court) ने प्रकरण क्रमांक MP/294/2025 में 01 दिसंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए कहा था कि
रतलाम (Ratlam) के कोमल नगर स्थित होटल के उत्तर दिशा में पूर्व-पश्चिम दिशा का आम रास्ता, जो होटल व्यवसायियों और स्थानीय नागरिकों के लिए उपयोग में था, उसे अविलंब अतिक्रमण मुक्त कर 5 जुलाई 2024 की स्थिति में बहाल किया जाए। लगातार सूचना देने के बावजूद रतलाम (Ratlam) जिला और नगर निगम प्रशासन ने इस आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं करते हुए कोर्ट के आदेश की अवेहलना की थी।
कलेक्टर को शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य
आवेदक द्वारा कोर्ट के आदेश पर 8 दिसंबर 2025 को रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह (Ratlam Collector Misha Singh) को हाईकोर्ट (Indore High Court) आदेश की पालना हेतु आवेदन दिया था। इसे रतलाम कलेक्टर सिंह (Ratlam Collector Misha Singh) ने टाइम लिमिट की बैठक में प्रस्तुत करने के लिए प्रस्तावित भी किया था, लेकिन इसके बाद भी रतलाम नगर निगम स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी।
हाईकोर्ट को ऐसे भी किया गया भ्रमित
मामले में नया मोड़ तब आया जब रतलाम नगर निगम के उपयंत्री अनवर कुरैशी द्वारा इंदौर हाईकोर्ट (Indore High Court) में शपथ पत्र देकर यह जानकारी दी गई कि कोमल नगर अवैध कॉलोनी है और प्रोफेसर कॉलोनी वैध कॉलोनी है। जबकि RTI के जवाब में रतलाम नगर निगम ने स्वयं स्वीकार किया कि कोमल नगर एक विकसित कॉलोनी है और प्रोफेसर कॉलोनी अब तक अविकसित कॉलोनी की श्रेणी में है। हाईकोर्ट में प्रस्तुत भ्रामक जानकारी ने पूरे मामले को अब और गंभीर बना दिया।
अवैध चबूतरे पर कोर्ट की सख्ती, फिर भी अमल नहीं
क्षेत्रीय नेताओं और कुछ समर्थकों द्वारा बनाए गए अवैध चबूतरे और ओटले के मामले में तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड, रतलाम ने प्रकरण क्रमांक RCSA 232/2024, आदेश दिनांक 1 अक्टूबर 2024 में रतलाम नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अवैध चबूतरा हटाया जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। लेकिन रतलाम नगर निगम ने इस आदेश को भी नजरअंदाज कर कोर्ट के आदेश की अवेहलना की है।
रहवासियों ने खोला रास्ता, नेताओं को नहीं आया रास
लगातार रतलाम जिला और निगम प्रशासन द्वारा कोर्ट के आदेश की कि जा रही उपेक्षा से परेशान होकर स्थानीय रहवासियों ने 12 जनवरी 2026 को स्वयं रास्ता खोल दिया था। सुबह जब रास्ता खुला मिला तो कथित क्षेत्रीय नेताओं को यह नागवार गुजरा। कुछ नेताओं ने समर्थकों को इकट्ठा कर मुख्य मार्ग पर चार घंटे तक चक्का जाम किया। दबाव बनाकर रतलाम नगर निगम आयुक्त को मौके पर बुलाया और दीवार दोबारा बनाने की मांग की थी। आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि मैं एफआईआर करा सकता हूं, लेकिन हाईकोर्ट (Indore High Court) के आदेश के बाद दीवार नहीं बनवा सकता। इसके बावजूद नेताओं ने अपने खर्च पर,
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कोर्ट के आदेश के विपरीत फिर से दीवार खड़ी कर रास्ता बंद कर दिया गया था, जिसे पुनः न्यायालय में चुनौती दी गई है।
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