

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। भारतीय रेलवे (Indian Railways) से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को अब यादगार के लिए गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिए जाएंगे। भारतीय रेलवे (Indian Railways) बोर्ड ने बुधवार को मेडल देने की परंपरा बंद कर दी है। बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा द्वारा जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यह फैसला राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लिया गया है। माना जा रहा है कि यह फैसला भोपाल मंडल में हाल ही में सामने आए मेडल घोटाले के कारण लिया है।


Indian Railways बोर्ड ने मार्च-2006 में राष्ट्रपति की स्वीकृति से सेवानिवृत्त होने वाले सभी रेल कर्मचारियों को लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा हुआ चांदी का रजत पदक प्रदान करने की परंपरा शुरू की थी। अब आने वाली 31 जनवरी 2026 को रिटायर हो रहे अधिकारियों को मेडल के बिना ही सेवानिवृत्त होना पड़ेगा। रेलवे डिपार्टमेंट के अनुसार मंडल में हर साल 400 से 500 कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं। रेलवे बोर्ड को इसका विकल्प तलाशना चाहिए।



तीन साल पहले घोटाला हो चुका था उजागर
बता दें कि उच्च स्तर पर सेवानिवृत्ति पर मेडल का घोटाला संचालित हो रहा था। 20 ग्राम वजनी मेडल में सिर्फ 0.23 प्रति. चांदी मिली थी। इस परंपरा के बंद होने के पीछे की मुख्य वजह कुछ दिनों पहले भोपाल मंडल में उजागर हुए मेडल घोटाले को माना जा रहा है। इसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को सम्मान के तौर पर दिए गए गोल्ड प्लेटेड चांदी के मेडल नकली निकले थे। पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर ने 23 जनवरी 2023 को इंदौर की फर्म मेसर्स वायबल डायमंड्स को 3640 गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल (सिक्के) सप्लाई का ऑर्डर दिया था। 3631 मेडल भोपाल के सामान्य भंडार डिपो में रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड के इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट के साथ प्राप्त हुए थे। इसकी पोल तब खुली जब एक रिटायर्डकर्मी इसे बेचने ज्वेलर्स के पास पहुंचा। बाद में सरकारी लैब में जांच कराई तो सिक्के कॉपर के बने निकले थे। इसमें चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत मिली थी। फिलहाल रेलवे ने कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ सप्लायर को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।




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