असीम राज पाण्डेय, रतलाम। सेवा के नाम पर हाल ही में शहर में जो चुनाव हुआ, उसने ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली कहावत को नई जान दे दी। दशक भर बाद हुए इस चुनाव में नियमों को अलमारी में बंद कर अफसरों ने मनमानी से प्रक्रिया पूरी कर डाली। लोकतंत्र के चुनाव की तर्ज पर सेवा की कुर्सी के लिए बैनर, प्रलोभन और चुनावी जुमलों से भरे इस महाखेल में सफेदपोशों की काली करतूतें भी उजागर हुई हैं। दवा माफियाओं से जिम्मेदारों की सांठगांठ की ऐसी गंध उठी है कि अब मामला सीधे कोर्ट की चौखट पर जल्द दस्तक देने वाला है। चुनाव से पहले शिकायतकर्ता को एक जिम्मेदार महोदया ने यहां तक नसीहत दे डाली थी कि हमें चैलेंज मत करना। यह महोदया वहीं हैं जो कुछ माह पूर्व एक पाठशाला की प्रदेश स्तरीय जांच में मीडिया के सामने वकील बनी थी और सरकार की रडार पर आई थीं। हाल ही में सेवा के दिखावे के नाम पर तैयार प्रकल्पों के लिए चुनावी अखाड़े में मतदाता सूची में भी कई गड़बड़झाले सामने आए है। ये अंदर की बात है… कि हार-जीत से बड़ा मुद्दा ये है कि जिम्मेदार अफसरों को कोर्ट में जवाब देने के लिए लाइन लगानी पड़ेगी। काले चिट्ठे तैयार हैं और नियम विपरित चुनाव की प्रक्रिया से अब चौराहों का बाजार गरमा चुका है।
स्पा स्पेशल में मसाला और वर्दी में रसाला
शहर के स्पा सेंटर फिर से चर्चा में हैं। खाकी के उच्चस्तर पर भनक लगी थी कि मसाज की आड़ में यहां कुछ और ही मसाला पक रहा है। जांच हुई तो सामने आया कि ‘सादी वर्दी’ में भी कुछ लोग हैं जो सेंटरों की मालिशखोरी में माहिर हैं। ऊपर से कुछ अन्य विभागों के ऊंची कॉलर करके घूमने वाले अफसर भी इसमें गोते लगा रहे हैं, जैसे ये मसाज सेंटर नहीं, बल्कि तैराकी का तालाब हो! चौराहों पर चाय की चुस्की के साथ चर्चा गरमा रही है कि यहां काम करने वाली घरवालों को गलत जानकारी देकर मसालेदार मसाज की दुनिया में कमाई कर रही हैं। हाल ही में एक सेंटर से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई, और अब सवाल ये कि इन सेंटरों को संरक्षण देने वाले आखिर हैं कौन? ये अंदर की बात है… कि जिम्मेदारों की नींद उड़ी हुई है और जल्द ही ‘सादी वर्दी’वाले कुछ चेहरे बेनकाब होंगे। अरसे से इन सेंटरों की सादी वर्दी से लेकर थानों पर बंदी का सिलिसिला भी बदस्तूर जारी है। सेंटर संचालक भले ही अपने पाकसाफ होने का प्रमाण प्रस्तुत करे, लेकिन आग सुलगी है तो जांच में जल्द पता चलेगा कि शहर में एक दर्जन से अधिक स्पा सेंटरों पर मसाज की जगह कौन – कौन सा मसाला पक रहा है।
प्रशासन का कमाल और खाकी ने चली चाल
जिले में इन दिनों अफसरशाही अपनी मनमर्जी के शिखर पर है। ताजा किस्सा बारिश के मौसम में सिविक सेंटर में अतिक्रमण हटाने पहुंचे अफसरों का है। भारी-भरकम लाव-लश्कर के साथ प्रशासन पहुंचा और सोचा कि खाकी ढाल बनेगी। पर खाकी ने मौके की नजाकत भांप ली और आदेश सुना डाला, दस कदम पीछे हटो! और मौके पर हेलमेट, जैकेट के साथ हाथों में लाठियां लेकर खड़ी खाकी देखते ही देखते पीछे हट गई। मीडिया ने सवाल पूछे तो निगम के प्रभारी ने जवाबदेही का झोला शहर की नई नवेली मैडम के कंधों पर डाल दिया। चौराहों पर चर्चा है कि जन्माष्टमी पर गोवंश का सिर मिलने के बाद हुए विरोध का बहाना बनाकर भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। शुक्र है, मीडिया की चुस्ती और सवालों की बौछार ने खानाबदोशों को हटवाने से रूकवा दिया। बैरंग कार्रवाई होता देख जिम्मेदार निगम के प्रभारी के चेहरे की रंगत भी फीकी पड़ी और नतीजा वही पुराना लौट के बुद्धू घर को आए। ये अंदर की बात है… कि राजीव गांधी सिविक सेंटर में भूमाफियाओं को जिस तरीके से फर्जी रजिस्ट्री कर निगम के पुराने अफसरों ने खेल खेला था कुछ उसी तरह से अब उक्त जमीन के आसपास से खानाबदोशों के झोपड़ों से मुक्त करने की बिसात बिछाई गई थी।