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छह माह के बेटे को मैजिक में छोड़ गई थी मां, 4 माह बाद पिता घर लेकर गए

रतलाम, वन्देमातरम् न्यूज।
करीब 4 माह पहले रावटी में एक मैजिक में छह माह अज्ञात बालक मिला था। जिसे चाइल्ड लाइन के जरिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर शिशु ग्रह भेज दिया था। अब 4 माह बाद बेटे को उसके पिता को सौंप दिया है।
बता दे कि चाइल्ड लाइन को 14 जुलाई 21 को रावटी थाने के अंतर्गत एक छः माह का अज्ञात बालक मिला था, जिसे उसकी माता मैजिक वाहन में छोड़ कर कहीं चली गई थी। टीम ने रावटी थाने के आसपास क्षेत्र में बालक के परिजनों की खोजबीन की परन्तु कोई कोई जानकारी नही मिल सकी। चाइल्ड लाइन टीम ने बालक को बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सुधीर निगम के आदेश से बालक को शिशु ग्रह भेजा था। 18 जुलाई को सूचना मिली की बालक काल्या पाड़ा शिवगढ़ का है। टीम द्वारा आशा कार्यकर्ता को गांव में भेजा व बालक के परिजनों से संपर्क किया। बालक के बड़े पापा मोहन से बात की उन्होंने बताया कि बालक की माता यह कहकर गई थी कि वह अपने पीयर गांव बददापुर जा रही है लेकिन वह वहां नही पहुंची। काका के लड़के दिलीप के मोबाइल में खबर देखी तो पता चला कि बालक की माता बालक को छोड़कर चली गई है व बालक के पिता सूरत (गुजरात) में काम करते हैं। चाइल्ड लाइन टीम द्वारा बालक के पिता पप्पू सिंह व दादा नानजी तथा बालक के नाना मानसिंह खराड़ी से सम्पर्क कर उन्हें बालक व अपने सभी दस्तावेजों के साथ बाल कल्याण समिति में बुलवाया गया ताकि आगामी निर्णय बालक के हित को ध्यान में रखते हुए लिया जा सके।
पहले किया मना
बालक के पिता व अन्य परिजन 19 जुलाई 21 को बालकल्याण समिति में प्रस्तुत हुए। किंतु बालक के परिजनो ने बालक को ले जाने से मना कर दिया, जिस कारण बालक को परिजनो के सुपुर्द नही किया जा सका।चार माह पश्चात भी बालक को लेने कोई भी परिजन नही आया है। चाइल्ड लाइन टीम द्वारा बालक के पिता से दुरभाष के माध्यम से बार -बार सम्पर्क किया परन्तु बालक के पिता का कहना है कि बालक की माता अभी लापता हैं बालक की देखरेख करने वाला कोई नही है। जब तक बालक की माता मिल नही जाती वह बच्चा नही ले जा सकते है।
सख्ती दिखाई तो पिता माना
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष निगम द्वारा चाइल्ड लाइन को आदेश किया गया कि बालक के पिता को समिति में प्रस्तुत करें जिसके आधार पर आगामी निर्णय बालक के हित मे लिया जा सके। चाइल्ड लाइन टीम ने बालक के पिता को सख्ती दिखाते हुए बताया कि यदि वह बालक को घर नही ले जाना चाहता है तो बालक को सरेण्डर कर दे ताकि बालक को उसके भविष्य के लिए गोद देने की प्रकिया में दिया जा सके। तत्पश्चात बालक के पिता 10 नवम्बर को बालकल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत हुए व बालकल्याण समिति के अस्थायी आदेश पर बालक को पिता के सुपर्द कर दिया गया। चार माह के पश्चात बालक की घर वापसी हुई।
घर वापसी में इनकी रही भूमिका
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष निगम, महिला बाल विकास विभाग से जिला पर्यवेक्षक अधिकारी राकेश तिवारी, बाल बाल संरक्षण अधिकारी टीना सिसोदिया, चाइल्ड लाइन टीम जिला समन्वयक प्रेम चौधरी, काउन्सलर सुनिता देवड़ा, टीम सदस्य अरुण भल्ला, दिव्या उपाध्याय, लोकेश पाटीदार, विनोद राठौर, बलराम पाटीदार, ममता मौर्य की भूमिका रही।


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