
असीम राज पांडेय, केके शर्मा, जयदीप गुर्जर
रतलाम। पिछले सप्ताह शहर के एक धर्म अखाड़े में राजनीति काफी गरमाई। दोनों पक्ष के समर्थक भी सड़क पर आए। इसी कर्मकांड को जन्म देने में अहम भूमिका निभाने वाले नमकीन दुकान वाले ‘नेताजी’ का नाम सामने आया। जो कि सनातनी का चोला भी थामे हुए चलते है। हुआ यूं धर्म के अखाड़े के माध्यम से चार दिन बाद प्रतिद्वंदी पर शिकंजा कसने की ठानी गई। धर्म के इस अखाड़े में नमकीन दुकान वाले फूलछाप के एक “नेताजी” बीच में कूद गए। अपने आकाओं की शरण लेकर हर काम में आगे रहने वाले यह इन नेताजी ने धर्म के अखाड़े में प्रतिद्वंदी पर एफआईआर करवाकर पटकनी भी दी। इसके बाद जब नेताजी को यह पता चला कि सामने वाले पहलवान को पता चल गया है कि उन्हें शिकस्त देने में किसकी बाजी है, तो “नेताजी” का ब्लडप्रेशर गड़बड़ा गया। नेताजी को उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके आका भर्ती हुए थे। अब चर्चा यह है कि धर्म के अखाड़े में लंगोट बांधकर भले ही “नेताजी” ने सत्ता के दम पर शिकस्त दी हो, लेकिन पहलवान किस अखाड़े में नेताजी को धूल चटाएंगे, यह राजनीति की नई बिसात बिछने पर जाहिर होगा।
इंतजार कराना इन माननीयों की खूबी है…
हर काम में समय की महत्ता जरूरी है। लेकिन संसदीय क्षेत्र के माननीय और शहर के माननीय को इस बात की चिंता नही है या फिर इंतजार कराना इनकी खूबी है। ऐसा ही कलेक्टोरेट में संसदीय क्षेत्र के माननीय की उपस्थिति में हुई बैठक में इन दोनों माननीय ने काफी इंतजार कराया। इंतजार करते – करते 35 किमी दूर से आए एक इन्हीं के पार्टी के एक माननीय बैठक छोड़ कर चले गए। क्योकिं उन्होंने समय को महत्व दिया। जबकि अधिकारियों की मजबूरी थी तो वह बैठे रहे। तय समय से करीब सवा घंटे देरी से बैठक शुरू हो पाई। वह भी औपचारिकता में सिमट गई। जब जब बैठक हुई उसके बाद संसदीय क्षेत्र के माननीय ने झांक कर तक नहीं देखा। जब भी यह रतलाम आए एक साथ तीन चार कार्यक्रम पहले से तैयार रहते है। बैठक वाले दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ था। पहले तो तीर्थयात्रियों को रवाना किया उसके बाद सीधे बैठक में आना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसी निजी कार्यक्रम को पहले महत्व दिया। उसके बाद दोनों माननीय बैठक में पहुंचें। फिर बैठक शुरू हो पाई।
सोशल मीडिया पर छा रहे संदेश ने बढ़ाई बेचैनी…
नगर सरकार बने हुए नो माह होने आ गए हैं। लेकिन अभी तक सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हर कोई अपना दमखम दिखाने के चक्कर में बुराइयों को भी मोल रहे है। पिछले दिनों पुलिस को दादागिरी दिखाने वाले एक नए नवेले ‘सत्ताधारी नेताजी’ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब छा रहे है। इनके पुराने काले चिट्ठे एक वाट्सएप संदेश के जरिए खूब वायरल हो रहे है। यह नगर सरकार के माननीय के भी खास है। हालांकि जो भी हो लेकिन जिसने भी यह संदेश बनाकर वायरल किया है या तो वह इनसे पीड़ित होगा या फिर ओर कोई बात होगी। हालांकि इस वायरल संदेश में सत्ताधारी के साथ साथ शहर के विपक्षी दल के नेता को भी घेरते हुए आइना दिखाते हुए जमीनी हकीकत से रूबरू कराया है। सत्ताधारी से लेकर आमजनों के भी वाट्सएप ग्रुप पर यह संदेश खूब वायरल हो चुका है। जो कि चर्चा का विषय बन गया।



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