
– आखिर तेंदुआ नहीं पकड़े जाने के क्या हैं प्रमुख कारण


सैलाना, वंदेमातरम् न्यूज।
सरवन और सैलाना क्षेत्र के जंगलों में ग्रामीणों के मवेशियों का शिकार करने वाला तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे 82 घंटे बाद भी खाली हैं। इंदौर के रालामंडल से आई रेस्क्यू टीम को गुरुवार दोपहर तक सफलता नहीं मिली है। तेंदुए की सही लोकेशन तलाशने में संसाधनों की कमी और जिलेभर के 25 वन रक्षकों की टीम के पास ठोस प्लानिंग नजर नहीं आ रही है। नतीजतन क्षेत्र के ग्रामीणों में अभी भी ख़ौफ बरकरार है।




इंदौर वनविभाग रालामंडल क्षेत्र की टीम द्वारा सोमवार को जंगलों में पिंजरा लगाने के बाद मंगलवार एंव बुधवार को शिवगढ़ रेंज, सैलाना रेंज एंव रतलाम रेंज की टीम के साथ सामूहिक रूप से तेंदुआ पकड़ने के लिए सर्चिंग की जा रही है। अभी तक टीम को कोई भी महत्त्वपूर्ण सुराग हाथ नहीं लगे हैं। संयुक्त टीम ने मंगलवार एवं बुधवार को तेंदुआ प्रभावित क्षेत्र ग्राम ओदरण के 10 किलोमीटर जंगल में सर्चिंग कर बारिकी से जांच की। साथ ही पगडंडी के रास्तों को साफ कराया ताकि तेंदुए के फुट प्रिंट हासिल हो सके।



तेंदुआ नहीं पकड़े जाने के यह प्रमुख कारण
– रालामंडल की रेस्क्यू टीम को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से अभी तक अवगत नही कराया गया।
– ऊबड़खाबड़ पगडंडी पर फुट प्रिंट तलाशने की सिर्फ ओपचारिकता निभाई जा रही।
– जल स्त्रोत के आसपास ट्रेप कैमरे नहीं लगाए गए, जिससे तेंदुए की हरकत के बारे में जानकारी मिल सके।
– वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के लिए सिर्फ पिंजरे में बकरी के बच्चे छोड़कर बैठा।
– सर्चिंग टीम के पास लेजर लाइट के अलावा दूरबीन का अभाव।
क्या कहतें हैं मामले में विशेषज्ञ
सर्चिंग टीम शिकार वाले स्थान और उसके आसपास जलस्त्रोत के बारे में पता लगाएं। एक निश्चित दूरी पर ट्रेक कैमरा लगाकर गतिविधि पर नजर रखी जाना आवश्यक है। इसके अलावा तेंदुए के स्टूल (मल) जहां-जहां भी मिले उसकी जांच की जाए, जिसके आधार यह पता चले की वह तेंदुआ ही है और वह जंगल में भूख किससे मिटा रहा है। -अभिषेक जैन, वनजीव एवं प्राणी विशेषज्ञ

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