
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में वह नजारा देखने को मिला, जब जनप्रतिनिधियों के तीखे सवालों और नाराजगी के आगे जिले के आला अफसरों की एक न चली। सांसद सुधीर गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सांसदों और विधायकों ने रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह (Ratlam Collector Misha Singh) सहित लगभग सभी प्रमुख विभागों की कार्यप्रणाली पर जमकर सवाल उठाए और कई मामलों में कड़ी फटकार भी लगाई।
बैठक से नदारद रहे अफसर, नोटिस के निर्देश
बैठक के दौरान रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) की डीन डॉ. अनिता मूथा सहित लगभग आधा दर्जन विभाग प्रमुखों की गैरमौजूदगी सामने आई। इसे गंभीरता से लेते हुए सदस्यों ने कड़ा ऐतराज जताया और रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) की डीन को सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि दिशा जैसी महत्वपूर्ण बैठक में जिम्मेदार अफसरों का न आना, शासन और जनता दोनों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।
रतलाम कलेक्टर पर भी भड़के विधायक
आलोट विधायक डॉ. चितामन मालवीय ने रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह (Ratlam Collector Misha Singh) पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों और आम जनता से जुड़े मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। दिशा बैठक की तारीख तीन-तीन बार बदली गई, इसके बावजूद फोल्डर समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए। इस पर रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह (Ratlam Collector Misha Singh) ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन विधायक संतुष्ट नजर नहीं आए।
करोड़ों की योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप
जल निगम के अफसर बैठक में सांसद और विधायकों के सबसे बड़े निशाने पर रहे। जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पाण्डेय, रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर और रतलाम महापौर प्रहलाद पटेल ने जल निगम की योजनाओं में भारी खामियां गिनाईं। आरोप लगाए गए कि शासन से मिले करोड़ों रुपये योजनाओं के नाम पर बर्बाद किए जा रहे हैं और जमीनी स्तर पर काम न के बराबर हो रहा है।
कृषि विभाग के जवाबों से असंतोष
कृषि विभाग की जिम्मेदार अधिकारी बीज प्रमाणीकरण, यूरिया के सही उपयोग और मिट्टी परीक्षण जैसे अहम मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। गोलमोल जवाबों पर सांसद और विधायकों ने नाराजगी जताते हुए नियमों के अनुसार और मापदंडों में रहकर काम करने के निर्देश दिए। सैलाना विधायक ने भी विभाग की खामियों को विस्तार से बैठक में रखा।
रतलाम स्वास्थ्य विभाग की बदहाली पर सवाल
रतलाम सीएमएचओ डॉ. संध्या बेलसरे की अनुपस्थिति में प्रभारी सीएमएचओ डॉ. वर्षा कुरील बैठक में पहुंचीं, लेकिन आयुष्मान कार्ड, अंधत्व निवारण जैसी योजनाओं पर सवालों के जवाब नहीं दे सकीं। नतीजतन उन्हें जनप्रतिनिधियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। कैबिनेट मंत्री व नगर विधायक चेतन्य काश्यप ने संजीवनी क्लीनिकों में अव्यवस्था पर नाराजगी जताई, वहीं जावरा विधायक ने जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को लचर बताया।
सड़क विभागों के इंजीनियरों की सरेआम क्लास
एमपीआरडीसी, लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री सड़क योजना से जुड़े इंजीनियरों को भरी बैठक में खड़ा कर सवाल पूछे गए। जनप्रतिनिधियों ने तीखे शब्दों में कहा“तुम्हें इंजीनियर किसने बनाया? सरकार के कर्मचारी हो या ठेकेदारों के?” फोरलेन, टोल नाके, सड़कों की गुणवत्ता, संधारण और राहगीरों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गोलमोल जवाब देने पर उन्हें कड़ी फटकार लगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग पर भी फटकार
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत कुपोषण के आंकड़ों पर भी सवाल उठे। आंकड़ों की विश्वसनीयता और जमीनी हकीकत में अंतर को लेकर विभाग प्रमुख को कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा।
8 माह से अधूरी सड़क का मुद्दा उठा
जावरा विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय ने रोग्यदेवी सड़क का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीनों से विद्युत पोल नहीं हटने के कारण सड़क निर्माण अटका हुआ है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है।
करीब साढ़े पांच घंटे चली बैठक
सुबह 11 बजे शुरू हुई दिशा समिति की बैठक शाम करीब 4.30 बजे तक चली। इतने लंबे समय के बावजूद कुछ ही विभागों की समीक्षा हो सकी, जबकि कुछ विभाग इस बार बच निकलने में सफल रहे। हालांकि जिन विभागों की समीक्षा हुई, उनके लिए यह बैठक किसी चेतावनी से कम नहीं रही।
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