
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिला मुख्यालय पर स्वास्थ्य सेवाएं आमजनता को मुंह चिढ़ा रही है। रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) डॉक्टरों (पीजी स्टूडेंट) का अखाड़ा बनकर सुर्खियां बंटोर रहा है, वहीं रतलाम जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) में इमरजेंसी सेवाओं के महत्व से ड्यूटी डॉक्टर अंजान हैं। डॉक्टरों पर उच्चाधिकारियों का अंकुश नहीं होने का आलम कुछ ऐसा है कि स्वास्थ्य सेवाएं मनमर्जी से संचालित हो रही और मीडिया में प्रमुखता से समाचार प्रकाशन होने के बाद नींद से जागने वाले जिम्मेदार बीमार सिस्टम को प्रेस रिलीज जारी कर खुद को सही ठहराने की कोशिश भी की है।
रतलाम जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) का एक वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक गंभीर बीमारी से पीड़ित युवक को परिजन रतलाम जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) लेकर पहुंचते हैं और इमरजेंसी वार्ड से ड्यूटी डॉक्टर गैर मौजूद नजर आने पर परिजन ही युवक की जान बचाने की जद्दोजहद करते नजर आते हैं, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने पर युवक दम तोड़ देता है। रतलाम जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) के इस बीमार सिस्टम का वीडियो वायरल होने के बाद नींद से जागे जिम्मेदार दौड़े-दौड़े अस्पताल पहुंचते और युवक की मौत पर पर्दा डालने के लिए एक कहानी मीडिया ऑफिस में पहुंचाने की कोशिश में जुट जाते हैं। वायरल वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि अस्पताल के डॉक्टर कक्ष में उस समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे अस्पताल की व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए।
ड्यूटी डॉक्टर को नहीं पता इमरजेंसी सेवा का मतलब
रतलाम जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) का बीमार सिस्टम गुरुवार दोपहर दो युवकों की जान नहीं बचा सका। जहर खाने वाले मरीज महेश (30) पिता नाथूलाल निवासी ग्राम बावड़ी खेड़ा को परिजन दोपहर को उपचार के लिए लेकर आए। इसी समय मुकेश पिता सुनगला भाभर को बीमारी के कारण जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) लाया गया। इस दौरान इमरजेंसी ड्यूटी पर दो डॉक्टर मौजूद थे। इमरजेंसी ड्यूटी से दोनों डॉक्टर डॉ. सौरभ बाफना और डॉ. सृष्टि दुबे अपना कक्ष छोड़कर गैर हाजिर थे। मुकेश जब इमरजेंसी वार्ड के बाहर तड़प रहा था, परिजन इधर उधर दौड़कर डॉक्टर को तलाश रहे थे। पूरे मामले का जब वीडियो वायरल हुआ तब आनन – फानन में नींद से जागे जिम्मेदार दौड़े दौड़े अस्पताल पहुंचे और मीटिंग में कहानी बनाकर मीडिया ऑफिस में प्रेस रिलीज जारी करवाई की दोनों डॉक्टर जहर खाने वाले मरीज महेश की जान बचा रहे थे। सवाल अहम यह है कि क्या दोनों डॉक्टर ने इमरजेंसी वार्ड के बाहर किसी जिम्मेदार को तैनात किया था कि अगर दूसरा कोई इमरजेंसी वार्ड में मरीज आता है तो उन्हें तत्काल सूचना दी जा सकी ?
दो युवकों की मौत के बाद बैठक महज नौटंकी
रतलाम जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) के बीमार सिस्टम का वायरल वीडियो पर पर्दा डालने के लिए हरकत में आए जिम्मेदारों ने एक कहानी गढ़ी। ड्यूटी डॉक्टरों की नाकामी पर पर्दा डालने के लिए बताया गया कि दो मिनट के अंतराल में दो मरीज रतलाम जिला अस्पताल (Ratlam District Hospital) पहुंचे थे। दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी। इनमें से एक मरीज ने जहर खाया था और दूसरा किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था। रतलाम जिला अस्पताल में आम जनता के स्वास्थ्य से बेफिक्र होकर डॉक्टरों की कहानी नई नहीं है। यहां ओपीडी में डॉक्टर टाइम पर नहीं आते तो इमरजेंसी सेवाएं लावारिश होना लाजमी है। इस सिस्टम के बीमार होने का प्रमुख कारण जिम्मेदारों की अनदेखी और मनमानी के साथ अफसर शाही प्रमुख है।
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