जयदीप गुर्जर
रतलाम, वन्देमातरम् न्यूज।
शहर में लगातार श्वानों के काटने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बुधवार को सामने आया। घर के बाहर खेलने के लिए निकली उमेरा पिता इमरान राठौड़ निवासी अशोक नगर को अचानक श्वान ने दबोच लिया जिससे श्वान के दाँत उसके गले में लग गए। गनीमत रही कि परिजनों के देख लेने से वह ज्यादा घायल नहीं हुई। बरहाल पूरे घटनाक्रम में नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली श्वानों के आतंक का एक बड़ा कारण बन रही है। अब तक जिले में 1700 से अधिक लोग श्वान के शिकार हो चुके हैं मगर एबीसी प्रोग्राम के तहत 20 अगस्त 2020 में स्वीकृत हुए 35.86 लाख की लागत वाले बधियाकरण केंद्र का आज तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। जबकि संबंधित एजेंसी को निर्माण कार्य पूरा करने के लिए वर्कऑर्डर में 3 माह का समय दिया गया था और आज 14 माह पूरे हो चुके हैं। गौरतलब है की कुछ दिनों पूर्व ही कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने डॉग बाईट पर चिंता जताते हुए श्वानों के बधियाकरण (नसबन्दी) करने व केंद्र को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। मगर आधे अधूरी व्यवस्था वाले बधियाकरण केंद्र पर शहर से पकड़े गए आवारा श्वानों को 5 दिन रखकर बधियाकरण किए बगैर वहीं ट्रेचिंग ग्राउंड पर छोड़ दिया गया तथा इतने लंबे समय बाद भी सबसे जरूरी इस कार्य को करने के लिए एनजीओ को जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा सकी है। पूरे मामले में अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी स्पष्ट नजर आ रही है तथा एबीसी प्रोग्राम पुनः खटाई में पड़ गया है।
क्या बोले जिम्मेदार
स्वास्थ्य अधिकारी जीके जायसवाल ने बधियाकरण में अब तक एनजीओ को जिम्मेदारी नहीं सौंपे जाने के सवाल को टालते हुए कहा की टेंडर लगा है जो 12-13 को खुलेगा व जानकारी उपयंत्री राजेश पाटीदार से लेने का कहते हुए फोन रख दिया। जब पाटीदार से बात की गई तो उन्होंने भी यही बात दोहराई और स्वास्थ्य अधिकारी से बात करने को कहा।
केंद्र निर्माण के मामले में निगम इंजीनियर सुरेशचंद्र व्यास से बात की गई तो उन्होंने निगम इंजीनियर हनीफ शेख से सम्पर्क की बात कही। इंजीनियर शेख ने फोन रिसीव ही नहीं किया।
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