
असीम राज पाण्डेय, रतलाम। रतलाम की हवा में इन दिनों दवा से ज्यादा दलाली की गंध घुली हुई है। इस गंध के मूल में हैं नगर निगम की एक माननीया के पतिदेव जो कभी कोविड संकट के समय इंजेक्शन की ब्लैक में बिक्री से खबरों में थे, तो अब झोलाछाप बंगालियों की छत्रछाया बनकर चर्चाओं में। मामला यूं है कि आदिवासी अंचल में एक मासूम की झोलाछाप इलाज से मौत हुई तो स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी और दो महीने में सात झोलाछाप बंगालियों पर कार्रवाई कर दी। लेकिन जिन पर कार्रवाई होनी थी, वही अब अपनी दुकानें बचाने के लिए “सियासी सरंक्षण” तलाशने लगे। उन्हें संरक्षण मिला भी, वही पतिदेव जिनका नाम संक्रमण काल में ब्लैक में इंजेक्शन बेचने वालों की सूची में शामिल था। अब उन्होंने कमर कसी और जिलेभर में झोलाछाप बंगालियों की कमान संभाल ली। बकायदा सैलाना रोड के एक होटल में भोज-भात के साथ बैठक हुई। फैसला हुआ कि सभी झोलाछाप अपनी दुकानदारी बचाने के लिए हर महीने चंदा देंगे जो अफसरों की जेब गरम करेगा। साथ ही दवाएं भी माननीया के पतिदेव की बदनाम मान्य दुकान से ही खरीदनी होंगी। ये अंदर की बात है कि … सेवा का संकल्प लेकर पार्टी में प्रवेश करने वालों का उद्देश्य यह है कि जनता की सेहत तो दूर जान भी चली जाए लेकिन अपनी दलाली का धंधा फलता-फूलता रहे। मासूम की मौत पर राजनीति ने चुप्पी साध ली और संवेदना को खूंटी पर टांग दिया।


इंजन जाम, गाड़ियां ठप और बाबू साहब बैचेन
राज्यस्तरीय औद्योगिक समारोह में जब प्रदेश के मुखिया रतलाम पधारे, तो स्वागत की तैयारियों में जिले के बड़े बाबू का सीना चौड़ा हो गया था। लेकिन जैसे ही VIP काफिले की 19 गाड़ियों में ईंधन भरवाया गया, वैसे ही बाबू साहब की धड़कनें तेज़ हो गईं। क्योंकि गाड़ियों में मिला था शुद्ध पानी मिश्रित पेट्रोल! इंजन जाम, गाड़ियां ठप और बाबू साहब बैचेन। अब दोष किस पर मढ़ा जाए? बाबूजी ने बड़ी चतुराई से पंप मालिक और मैनेजर पर FIR करवा दी, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि इतने सालों से जिले के पेट्रोल पंपों की जांच क्यों नहीं हुई? आम आदमी तो रोज़ मिलावट का शिकार हो रहा है, पर प्रशासन की आंखें तब खुलती हैं जब मुखिया की गाड़ी बंद हो जाए। ये अंदर की बात है… कि ये घटना साबित करती है कि प्रशासन का सिस्टम सिर्फ डर से ही काम करता है। जब जवाबदेही तय करनी हो, तो छोटे कर्मचारियों की बलि चढ़ा दी जाती है। लेकिन जनता पूछ रही है पेट्रोल में पानी है या सिस्टम में ?



सरकार के खिलाफ छात्रों की सियासी पाठशाला
शहर के एक स्कूल की मान्यता अटकने से छात्रों में असंतोष उपजा। फिर क्या था छात्रों ने माता-पिता को साथ लेकर शहर माननीय के दरवाजे पर दस्तक दे डाली। लेकिन ये विरोध भी उस वक्त राजनीतिक नाटक में बदल गया जब परिषद से जुड़े छात्र नेताओं ने मौके को भांपते हुए बच्चों को सड़कों पर बैठा दिया और सोशल मीडिया पर “शानदार” तस्वीरें वायरल कर दीं। रोचक बात ये रही कि इस ‘आंदोलन’ में आगे-आगे जिले के एक फ़ुलछाप पार्टी में शामिल नेताजी और नेत्रीजी दंपति की बेटी थी। जिसने नारे लगवाए, बाइट दिलवाई और फोटो खिंचवा कर चली गई। अब पार्टी में सवाल उठ रहा है क्या ये “फोटोबाजी आंदोलन” पार्टी की जानकारी में था? किसने इसकी मंजूरी दी? और क्या ये खुद की सरकार के खिलाफ साजिश है या पब्लिसिटी की ख्वाहिश? ये अंदर की बात है… कि जल्द ही अनुशासन हीनता कर राजनीति चमकाने वाले इन छात्र नेताओं की ‘सीढ़ी’ खींची जा सकती है।




Website Design By
KAMAKSHI WEB
CONTACT : +91-9753910111



क्या आप कभी कृषि उपज मण्डी महू रोड में हो रही अत्यधिक गंदगी के बारे में जानकारी ले सकते है