असीमराज पांडेय, केके शर्मा
रतलाम। नगर निगम के बड़े बाबू इन दिनों सुर्ख़ियों में छाये हैं। भाजपा बहुमत वाली निगम परिषद के बड़े बाबू ने ऐसा शर्मसार किया कि किसी के पास जवाब नहीं है। प्रदेश मुखिया भले ही बहू-बेटी की आबरू से खिलवाड़ करने वालों को नेस्त-नाबूद करने में जुटे हैं, लेकिन निगम के बड़े बाबू ने दुष्कर्मी को निलंबन से बहाल कर संवेदना को भी शर्मा दिया। यह अंदर की बात है कि जेल से छुटने के बाद दुष्कर्मी ने अर्जी के साथ एप्रोच ऐसी नेत्री से लगवाई थी जो बड़े बाबू को आए दिन बंगले पर टिफिन पहुंचाती है। नेत्री का नमक खा रहा बड़ा बाबू को कर्ज तो चुकाना ही था।
नहीं निकलता मार्च तो सोते रहते जिम्मेदार
गली-मोहल्लों से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर मादक पदार्थ का कारोबार अरसे से फल-फूल रहा था। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद संबंधित पर कार्रवाई कर दिखावा भर में नौकरी बचाई जा रही थी। जागरूक जनता सड़क पर उतर खाकी के खिलाफ नारेबाजी का असर यह रहा कि पिछले 5 दिन में 7 मादक पदार्थ की कार्रवाई जिले के थानों पर देखने को मिली। यह अंदर की बात है कि पैदल मार्च नहीं होता तो कप्तान का पारा भी नहीं बढ़ता और जो आज फोटो छपवा रहे हैं, उनके सरंक्षण में मादक का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी रहता। जिले में फल फूल रहे अवैध कारोबार को लेकर जिले के एक सत्ताधारी विधायक भी खाकी वर्दी के खिलाफ विधानसभा में प्रश्न लगा चुके है। ऐसे में ताबड़तोड़ कार्रवाई कर खाकी वर्दी खुद अपनी पीठ थपथपा रही है।
इधर उधर करने में खूब चला खेल
चुनावी साल में सरकारी कर्मचारियों को इधर-उधर करने का खेल शुरू हो चुका है। पहली खेप में शिक्षा, राजस्व, ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों को इधर उधर कर दिया है। कुछ ने अपनी मनमर्जी की जगह पर जाने के लिए बड़े से लेकर छोटे सत्ताधारियों के अगल-बगल चक्कर भी कांटे थे। इधर-उधर के खेल में बड़े सत्ताधारियों की तो खूब चली, लेकिन छोटे सत्ताधारियों की नहीं चल पाई। अंदर की बात यह है कि इस खेल में संगठन और ग्रामीण क्षेत्र से खूब खेल हुआ है जबकि कुछ छोटे सत्ताधारी जिन्होंने कर्मचारियों को अपनी मनपसंद जगह पर पहुंचाने का भी बीड़ा उठाया था, लेकिन उनकी चल नहीं पाई।
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