रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। जिला मुख्यालय पर संचालित अपना घर आश्रम में मानसिक रूप से विक्षिप्तों (प्रभू जी) की सेवा के साथ परिवार से मिलवाने का सिलसिला बदस्तूर बना हुआ है। तीन साल से लापता एक प्रभू जी (व्यक्ति) को अपने परिवार से मिलाने का काम रतलाम के अपना घर आश्रम ने किया है। 4 माह पूर्व व्यक्ति को अपना घर आश्रम में लाया गया था। जिनकी मानसिक स्थिति सहीं नहीं थी। लगातार उपचार के बाद उन्होंने अपना नाम और घर के बारे में बताया। इसके बाद परिजनों को सूचना दी। हरियाणा से भाई जब अपना घर आश्रम पहुंचे तो प्रभूजी का चेहरा खुशी से खिल उठा।

बता दें कि चार माह पूर्व आकाश शर्मा की सूचना पर रतलाम अपना घर आश्रम की रेस्क्यू टीम द्वारा मानसिक रूप से दयनीय हालात में एक व्यक्ति (प्रभू जी) को लाकर रखा था। पूछताछ करने पर कुछ नहीं बताया। हालात ठीक नहीं होने पर आश्रम में डॉ. कपिल देव आर्य एवं डॉ. गौरव चित्तौड़ा व मेडिकल टीम ने उपचार किया। साथ ही आश्रम के सेवादारों के प्रयासों के बाद मानसिक स्थिति में सुधार हुआ। 5 दिन पूर्व प्रभू जी ने अपना नाम दलवीर बताया। घर के बारे में जानकारी दी। बताया कि वह हरियाणा का रहने वाला है। तब आश्रम कार्यालय प्रभारी प्रदीप कुमार द्वारा उनके घर का पता लगाया। परिजनों की खोज कर सूचना पहुंचाई। दलवीर सिंह के भाई रामकरन ग्राम जागसी , सोनीपत (हरियाणा) से अपना घर आश्रम रतलाम आए। शनिवार को भाई के साथ दलवीरसिंह को खुशी-खुशी रवाना किया। 3 साल बाद अपने भाईयों के मिलन पर दोनों के खुशी के आंसू निकल आए। आश्रम सेवादारों ने भी दलवीर को भाई रामकरन के साथ खुशी-खुशी रवाना किया।
सेवा का पर्याय है अपना घर आश्रम
अपना घर आश्रम सागोद में स्थित है। आश्रम में सड़कों पर बेसहारा बदहाल अवस्था में घूमने वाले लोगों को लाकर उनकी सेवा की जाती है। कई लोग ऐसे होते है जिनके चेहरे पर बड़ी दाड़ी, बड़े बाल, कई समय से नहाना तक नहीं होता है। इस आश्रम में लाने के बाद दाड़ी-कटिंग से लेकर नहलाने व किसी भी प्रकार की बीमारी का इलाज तक कराने की व्यवस्था कर रखी है। सड़कों पर दर-बदर घूमने वाले इन बेसहारा, असहाय, लावारिस लोगों को अपना नाम व घर का पता तक नहीं मालूम होता है, आश्रम में हर एक व्यक्ति को प्रभू जी कहकर पुकारा जाता है।
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