नींबू के बगीचे में बना रखा था ठिकाना, वन विभाग की टीम ने किया खुलासा
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम जिले के ग्राम जड़वासाखुर्द गांव में रविवार को अचानक हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने खेतों में एक जंगली जानवर को भागते हुए देखा। पहली नजर में वह तेंदुआ लगा, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई। लोग लट्ठ और हथियार लेकर उसे पकड़ने दौड़ पड़े। वन विभाग को भी सूचना दी गई, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची। लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो सब हैरान रह गए—जिसे तेंदुआ समझा जा रहा था, वह लकड़बग्घा निकला!
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने इलाके की छानबीन की। ग्रामीणों ने जिस स्थान पर जानवर को देखा था, वहां नींबू के बगीचे में एक बड़ा बिल (गड्ढा) मिला। जांच में पता चला कि यह लकड़बग्घा का आश्रय स्थल था। अधिकारियों ने वहां फूडमार्क (पंजों के निशान) की जांच की और पुष्टि की कि यह तेंदुए के नहीं, बल्कि लकड़बग्घा के निशान थे। रेस्क्यू टीम के प्रभारी हरीसिंह डामर ने वंदेमातरम् न्यूज को बताया कि लकड़बग्घा और तेंदुआ दिखने में काफी हद तक समान लग सकते हैं, लेकिन इनके पंजों के निशान अलग होते हैं। तेंदुए के पंजों में नाखून नहीं दिखते, जबकि लकड़बग्घा के पंजों में साफ नाखून के निशान होते हैं।
हार्वेस्टर की आवाज से घबरा गया था लकड़बग्घा
रविवार को खेतों में हार्वेस्टर मशीन से गेहूं की कटाई चल रही थी। मशीन की तेज आवाज से घबराकर लकड़बग्घा अपने बिल से बाहर निकल आया और भागने लगा। उसी समय ग्रामीणों ने उसे देखा और तेंदुआ समझकर शोर मचा दिया। ग्राम पंचायत के सचिव दिलीपसिंह सिसोदिया ने बताया, “ग्रामीणों ने पहले तेंदुए की सूचना दी थी, लेकिन जब वन विभाग की टीम ने जांच की, तो पता चला कि वह लकड़बग्घा था। डर की वजह से उसने खेतों की ओर भागकर खुद को बचा लिया।”
गांव में फिर भी सतर्कता बरतने की सलाह
हालांकि इस बार यह तेंदुआ नहीं, बल्कि लकड़बग्घा निकला, फिर भी वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारी राधेश्याम जोशी ने कहा कि गांवों के आसपास जंगल और खेतों में ऐसे जंगली जानवरों का आना आम बात है। ऐसे में घबराने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करना चाहिए।
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