
असीम राज पांडेय, रतलाम। स्वच्छता का सरताज बनाने वाले इंदौर की चमक पर भागीरथपुरा त्रासदी ने ऐसा दाग लगाया है, जो साबुन-पानी से नहीं धुलेगा। दूषित पानी पीने से अब तक 18 मौतें हो चुकी हैं, लेकिन सिस्टम की संवेदना अब भी पाइपलाइन में फंसी हुई है। भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार हो या अफसरों की चौकड़ी सबके माथे पर सवालिया हैं। रतलामवासियों के लिए यह कोई नई कहानी नहीं। यहां तो बरसों से नकारा सिस्टम अपनी लापरवाही और मनमानी का शुद्ध (या यूं कहें अशुद्ध) पानी पिलाता आ रहा है। फर्क बस इतना है कि इंदौर में हादसा हुआ, तो अचानक कैबिनेट मंत्री से लेकर नगर सरकार जाग गई। बैठकों का दौर चला, अफसरों की नींद टूटी और परिणाम यह कि पिछले 72 घंटे में दूषित पानी की 175 शिकायतें हेल्पलाइन में दर्ज हो गईं। सोचिए, अगर इंदौर में यह हादसा न होता तो? रतलाम की जनता आज भी जलप्रदाय विभाग के चक्कर काटते-काटते अपनी चप्पलें घिस रही होती। जनता के मन में एक ही सवाल गूँज रहा है, अरसे से मटमैला पानी पी रहे लोगों को असली न्याय कब मिलेगा? ये अंदर की बात है… (This is an inside story) कि जब तक रतलाम निगम के जलप्रदाय के नकारा अफसरों और इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता को राहत नहीं सिर्फ़ गंदा पानी मिलता रहेगा।
एक संकल्प से ‘भैया’ को मिल सकती सच्ची श्रद्धांजलि
हरफनमोला स्वभाव और दूसरों के दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले समाजसेवी अश्विनी शर्मा के जाने से रतलाम आज भी स्तब्ध है। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा ऐतिहासिक हुजूम इस बात का प्रमाण था कि इंसान खाली हाथ नहीं जाता अगर उसने दिलों में जगह बनाई हो। अंतिम यात्रा में शामिल गणमान्यजनों के बीच एक बात बार-बार गूंजती रही, भैया को सच्ची श्रद्धांजलि उनके कामों को आगे बढ़ाना है। इसमें सबसे बड़ा सवाल रतलाम के एकमात्र खेल मैदान नेहरू स्टेडियम का है, जिसे खेलों के बजाय धर्म, राजनीति और प्रशासनिक शौक पूरा करने का मैदान बना दिया है। ये अंदर की बात है… (This is an inside story) कि अश्विनी भैया की आत्मा को सच्चा सुकून तभी मिलेगा, जब नेहरू स्टेडियम को खेल गतिविधियों के अलावा अन्य आयोजनों से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा। संकेत साफ़ हैं जल्द ही खेल संगठनों के साथ अन्य संगठन भी आवाज़ बुलंद करेंगे। उस दिन यह मान लिया जाएगा कि रतलाम ने सच में अपने समाजसेवी को श्रद्धांजलि दी है।
हम तो नियम तोड़ेंगे पर चालान ज़रूर बनाएंगे
रतलाम जिले की यातायात व्यवस्था संभालने वाले विभाग ने वर्ष 2025 का रिपोर्ट कार्ड जारी कर भले ही कॉलर ऊंची कर ली हो, लेकिन इस रिपोर्ट में सबसे चमकदार आंकड़ा है हेलमेट न पहनने वालों पर सबसे ज़्यादा चालान। मजेदार बात यह है कि नियमों का पालन करवाने वाला अमला खुद इन नियमों से कोसों दूर खड़ा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल 9 हजार 886 चालान बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के बनाए गए। वहीं दूसरी ओर, खाकीधारी साहबान न हेलमेट पहनते हैं, न नियम मानते हैं और उल्टा दोपहिया पर ट्रिपल सवारी करते हुए तो वे बड़े गर्व से दिख जाते हैं। मुख्यालय से कितने ही फरमान जारी हो जाएं सब हवा में उड़ जाते हैं। आमजन के मन में सवाल उठना लाज़मी है कि जब रक्षक ही नियम तोड़ेंगे, तो नागरिक किससे सीख लें? ये अंदर की बात है… (This is an inside story) कि “सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का” कहावत को आज रतलाम के यातायात कर्मी और थानों के पुलिसकर्मी पूरे मनोयोग से चरितार्थ कर रहे हैं।
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