
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। जनसंघ (Jana Sangh) से लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तक की वैचारिक यात्रा, संघर्ष और संगठन निर्माण की गाथा को सहेजना वर्तमान समय में एक असाध्य कार्य जैसा है, जिसे पुस्तक ‘युग पुरुष बाबूजी’ (Yug Purush Babuji) के लेखकों ने पूरी ईमानदारी और गंभीरता से अंजाम दिया है। यह बात पद्मभूषण सम्मानित, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष और आठ बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री, उज्जैन से सात बार लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद रहे सत्यनारायण जटिया ने कही।
अवसर था पुस्तक के लेखक एवं रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेशपुरी गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार व प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष नीरज कुमार शुक्ला तथा पत्रकार अदिति मिश्रा द्वारा पुस्तक भेंट किए जाने पर दोनों वरिष्ठ नेताओं ने इसके लेखन, शोध और प्रस्तुति की सराहना की। सुमित्रा महाजन ने कहा कि पुस्तक की भाषा, संरचना और तथ्यात्मकता से स्पष्ट है कि लेखकों ने गहन अध्ययन और गंभीर परिश्रम किया है। वहीं सत्यनारायण जटिया ने इसे केवल एक व्यक्ति की जीवनी न मानते हुए मालवा अंचल की वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक यात्रा का सजीव दस्तावेज बताया।
कठिन दौर में संघ और जनसंघ की रीढ़ थे बाबूजी
पुस्तक ‘युग पुरुष बाबूजी’ (Yug Purush Babuji) डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय की जीवन यात्रा पर आधारित है, जिन्होंने जनसंघ के कठिन दौर में मालवा और मध्यभारत में संगठन की नींव को मजबूती प्रदान की। डॉ. पाण्डेय मंदसौर संसदीय क्षेत्र से आठ बार सांसद रहे और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व भी निभाया। मध्यप्रदेश गठन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री को पराजित कर विधायक बनने का ऐतिहासिक कीर्तिमान भी उनके नाम दर्ज है। मालवा में जनसंघ के पहले विजयी हस्ताक्षर के रूप में उन्हें विशेष पहचान प्राप्त है।
शीर्ष नेताओं के अंदरुनी और रोचक प्रसंगों से सजी पुस्तक
यह पुस्तक 1940 के दशक से लेकर 2010 के दशक तक जनसंघ के संघर्षपूर्ण दौर, आपातकाल की परिस्थितियाँ, 80-90 के दशक के वैचारिक बदलाव, गुटबाजी की आहट और 2000 के बाद भारतीय राजनीति में आए व्यापक परिवर्तनों का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत करती है। पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं से जुड़े रोचक और अंदरुनी किस्से शामिल हैं। साथ ही कश्मीर समस्या, राफेल डील, आयुष बिल जैसे विषयों पर पुरानी रिपोर्ट्स और संदर्भ भी पुस्तक को विशिष्ट बनाते हैं।
विमोचन के साथ ही पाठकों से मिल रही सराहना
पुस्तक के पाठकों ने समीक्षाओं में कहा है कि यह केवल बाबूजी की जीवनी नहीं, बल्कि मालवा की वैचारिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का गंभीर प्रयास है। पगडंडी पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित यह कृति स्थानीय इतिहास और साहित्य को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे पूर्व पुस्तक का विमोचन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के करकमलों से हुआ। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना, प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सदस्य बंशीलाल गुर्जर, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा, जिला पंचायत अध्यक्ष लालाबाई शंभुलाल चंद्रवंशी, विधायक मथुरालाल डामोर, जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, पूर्व मंत्री हरदीप सिंह डंग सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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