


सैलाना, वंदेमातरम् न्यूज। लंबे समय से रतलाम जिले के सैलाना (Sailana) में विवादों से घिरे बस स्टैंड विस्तारीकरण मामले का अब पटाक्षेप हो गया। न्यायालय द्वारा दुकानदारों की ओर से प्रस्तुत स्थगन (स्टे) याचिका खारिज किए जाने के बाद सैलाना नगर परिषद ने प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में सुलभ कॉम्प्लेक्स के समीप स्थित 15 जर्जर दुकानों को जेसीबी चलाकर जमींदोज कर दिया। दुकानों के हटने से अब बस स्टैंड क्षेत्र के पुनर्निर्माण और विस्तारीकरण की यह पूरी तरह साफ हो गई है। कार्रवाई पूरी होने पर बस स्टैंड व्यापारी संघ ने नप अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला सहित परिषद टीम और प्रशासनिक अधिकारियों का पुष्पमालाओं से स्वागत कर आभार जताया।



मंगलवार तड़के 5 बजे से ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया था। मौके पर नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला सहित तहसीलदार, थाना प्रभारी के अलावा सरवन, बाजना, रावटी व सैलाना थाने का भारी पुलिस बल, परिषद का अमला और सफाई मित्र तैनात रहे। सुरक्षा के मद्देनजर फायर ब्रिगेड, डायल 112 और एंबुलेंस को भी मौके पर तैनात रखा गया। प्रशासन ने दुकानों का विधिवत पंचनामा बनाकर वीडियोग्राफी कराई। इसके बाद 3 जेसीबी मशीनों ने कार्रवाई शुरू कर करीब दो घंटे में सभी 15 जर्जर दुकानों को पूरी तरह धराशायी कर दिया।



नप अध्यक्ष बोले- दुकानदारों को मोहरा बनाया
बस स्टैंड विस्तारीकरण योजना के तहत जीर्ण-शीर्ण दुकानों को हटाने का कुछ दुकानदारों ने विरोध किया था। मामला हाईकोर्ट इंदौर से लेकर स्थानीय न्यायालय तक पहुंचा। अंततः कोर्ट से स्थगन खारिज होने के बाद परिषद ने कार्रवाई को अंजाम दिया। नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने दुकानदारों को मोहरा बनाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया। उन्हें समाधान का रास्ता दिखाने के बजाय बेवजह कानूनी लड़ाई की ओर धकेल दिया। लेकिन जब कार्रवाई का समय आया तो दुकानदारों को गुमराह करने वाले नेता कहीं नजर नहीं आए।
विस्थापितों को प्राथमिकता की संभावना
जर्जर दुकानों के हटने के बाद बस स्टैंड पर आधुनिक निर्माण और सुगम यातायात की उम्मीद बंधी है। नगर परिषद की योजना के अनुसार भविष्य में यहां आधुनिक दुकानें बनाई जाएंगी, जिनमें नियमानुसार पूर्व दुकानदारों परों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटन की संभावना है। विस्तारीकरण को सिंहस्थ की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह योजना अटकती तो बस स्टैंड को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की नौबत आ सकती थी, जिससे 200 से अधिक कारोबारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता। अब नगरवासियों व व्यापारियों ने नगर परिषद के इस कदम का स्वागत किया है।

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