
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के Ratlam जिले के जावरा (Jaora) में एक बार फिर गैस रिसाव से अफरा-तफरी की स्थिति बनी। रतलाम जिला उद्योग विभाग की सुस्ती का नतीजा ऐसा रहा कि घटना के दौरान न इंजीनियर न प्रशिक्षित स्टाफ मिला। हालत ऐसे बने कि गैस रिसी तो प्रशासन भी 4 घंटे तक काबू नहीं कर पाया। मौके पर पहुंचे अफसर और नेता एक बार फिर पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बनकर खड़े नजर आए। इसके पूर्व जावरा (Jaora) की आइस फैक्ट्री में 8 अप्रैल 2025 की रात अमोनिया गैस का रिसाव होने से हड़कंप मचा था और औपचारिक जांच के बाद जिम्मेदारों ने फाइल को बंद कर दिया था। पूर्व की घटना से सबक नहीं लेना का नतीजा शनिवार की शाम को घटना की पुनरावृत्ति है।
जावरा (Jaora) के रतलाम नाका (Ratlam Naka) स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में फेरिक सल्फेट पाउडर बनाने की फैक्ट्री में शनिवार शाम 5 बजे एक सिलेंडर से क्लोरीन गैस का रिसाव हो गया। वहां मौजूद 3 कर्मचारियों को घबराहट हुई तो वे तुरंत फैक्ट्री से बाहर निकले। आसपास 10-12 फैक्ट्रियों के श्रमिक भी काम बंद करके जान बचाकर भागे। फिर भी गेहूं सार्टेक्स के दो कर्मचारी बीमार हो गए जिन्हें नर्सिंग होम में भर्ती कराया। मौके पर पहुंची Jaora नपा की दमकल के 4 कर्मचारियों की तबीयत भी बिगड़ गई। जिन्हें Ratlam रेफर किया। फैक्ट्री के आसपास आबादी क्षेत्र होने से अफरा-तफरी मच गई। केमिक लेबोरेटरीज नाम से संचालित इस फैक्ट्री के मालिक का नाम शाहिद खान बताया जा रहा है। फैक्ट्री में रखे 20 किलो वजनी पुराने सिलेंडर से अचानक क्लोरीन गैस का रिसाव होने लगा। इससे वहां मौजूद कर्मचारी भूपेंद्र सिंह और उनके दो साथियों को घबराहट हुई। वे फैक्ट्री से बाहर निकले और गेट बंद कर दिया। तब तक सिलेंडर से काफी मात्रा में क्लोरीन गैस का रिसाव हो चुका था। हवा के रुख की तरफ जितने भी सार्टेक्स प्लांट और फैक्ट्रियां चल रही थीं। इसका प्रभाव वहां तक फैल गया। आंचलिया सार्टेक्स में काम करने वाले कर्मचारी शब्बीर खान और पंकज माली को उल्टियां होने लगीं। इन्हें Jaora के पिपलौदा रोड स्थित नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।
क्लोरीन गैस इसलिए खतरनाक
क्लोरीन गैस पीले-हरे रंग की तीखी गंध वाली जहरीली और संक्षारक गैस है। इसका उपयोग सफाई या कीटाणुनाशक रासायनिक उत्पाद बनाने में किया जाता है। जैसे फिनाइल, ब्लीच इत्यादि। यहां फैक्ट्री में इसका उपयोग फेरिक सल्फेट पाउडर बनाने में हो रहा था। इसे औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार में भी उपयोग किया जाता है। पानी के संपर्क में आने पर क्लोरीन गैस से रासायनिक क्रिया होकर हाइड्रोक्लोराइड एसिड बनता है। इससे खतरनाक हो जाती है और सांस लेने पर आंख, गले, फेफड़ों में जलन होती है तथा जी मचलता है। क्लोरीन गैस का रिसाव होने पर इसे सोडियम कार्बोनेट यानी वाशिंग सोडा अथवा सोडियम थायोसल्फेट का उपयोग करके नियंत्रित किया जा सकता है।
इप्का से पहुंची टीम ने बंद किया गैस का रिसाव
जिस फैक्ट्री में रिसाव हुआ वहां कोई प्रशिक्षित स्टाफ नहीं था। 10वीं या उससे भी कम पढ़े लिखे कर्मचारी थे जबकि फैक्ट्री में रासायनिक उत्पाद बना रहे थे। केमिकल इंजीनियर नहीं था। न मास्क थे और न ही सुरक्षा कीट। यही हालत प्रशासन के भी थे। एसडीएम, सीएसपी और थोड़ी देर बाद विधायक भी मौके पर पहुंचे। रतलाम से कलेक्टर, एसपी भी आए। विधायक और अधिकारियों ने फैक्ट्री मालिक को सुरक्षा इंतजाम नहीं होने पर खूब खरी-खोटी सुनाई। बड़ा सवाल यह भी है कि प्रशासन के पास भी कोई इंतजाम नहीं मिले। पूरा जिला प्रशासन अलर्ट हो गया लेकिन 4 घंटे तक यानी रात 9 बजे तक सभी अधिकारी और नेता मूकदर्शक बने रहे। गैस रिसाव को रोक नहीं पाए। रात 9 बजे रतलाम इप्का (IPCA) फैक्ट्री से प्रशिक्षित कर्मचारी नितेश पाल टीम के साथ पहुंचे और क्लोरीन किट के साथ फैक्ट्री में पहुंचकर जिस सिलेंडर से गैस रिसाव हो रहा था उसमें लकड़ी का गुल्ला ठोककर पानी डाला। इससे रिसाव बंद हो गया। रात 10 बजे नागदा से ग्रेसिम की टीम आई जिन्हें सिलेंडर सुपुर्द किया। नपा की दमकल के कर्मचारियों के पास भी गैस रिसाव से निपटने के लिए कोई किट उपलब्ध नहीं थी। वे बिना सुरक्षा इंतजाम के ही घुसे और तबीयत बिगड़ गई।
पूर्व में हादसे के बाद भी सोता रहा उद्योग विभाग
8 अप्रैल 2025 की दरमियानी रात मध्य प्रदेश के Ratlam के जावरा (Jaora) में आइस फैक्ट्री से अमोनिया गैस का रिसाव होने से हड़कंप मच गया था। फैक्ट्री के मजदूर काम छोड़कर भाग गए थे। वहीं फैक्ट्री के पास नाइट वॉक कर रहे पुलिस कर्मियों की आंखों में जलन और आंसू आने लगे तो पूरी घटना का खुलासा हुआ। जावरा के आंटिया चौराहा स्थित पोरवाल फैक्ट्री की यह घटना थी। सूचना पर ताबड़तोड़ आसपास के घरों को खाली करवाया गया था।
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