
असीमराज पांडेय
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
आमजन की समस्याओं को सुलझाने के लिए विश्वासरुपी मतदान से निर्वाचित होकर नगर सरकार में पहुंचे जनप्रतिनिधि अब स्वयं के सुख-सुविधाओं पर जोर देने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि निगमाध्यक्ष के पद पर निर्वाचित होने के 21 दिन बाद भी मनीषा शर्मा अपने कक्ष में नहीं बैठी। कारण महापौर की तर्ज पर अध्यक्ष का चैंबर तैयार नहीं होना है। इधर 10 सदस्यीय मेयर इन कांउसिल (एमआईसी) घोषित हुए 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मलाईदार विभाग की अंदरूनी स्तर पर जारी खींचतान से पेंच फंसा हुआ है। संभावना है कि 2 सितंबर बाद मेयर इन कांउसिल (एमआईसी) में सदस्यों को विभाग सौंपे जा सकते हैं।


गौरतलब है कि ढाई साल बाद नगर सरकार के आने पर आमजन को वार्ड पार्षदों से बेहतर कार्यों की उम्मीद जागी थी। शपथ के 23 दिन बीतने के बाद भी प्रमुख समस्या सड़क पर गड्ढे, पानी और स्ट्रीट लाइट के लिए नागरिक नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। शुरुआती दौर में ही भाजपा की सत्ताधारी नगर सरकार में अंदरूनी खींचतान होना निगम के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। निगमाध्यक्ष शर्मा के लिए नगर निगम प्रशासन लग्जरी कक्ष निर्माण में जुटा है। निगमाध्यक्ष शर्मा के कुर्सी पर बैठने को भाजपा के वरिष्ठ उनके द्वारा मुहूर्त बताए जाने की बात कह रहे हैं। पर्दे के पीछे की बात यह है कि निगमाध्यक्ष शर्मा की मंशा के अनुरूप नए सिरे से कक्ष का निर्माण होते ही 3 सितंबर के बाद वह निगम में बैठना शुरू कर देंगी। वहीं पर्वाधिराज पर्यूषण के बाद शहर विधायक चेतन्य काश्यप के रतलाम पहुंचते ही महापौर प्रहलाद पटेल की ओर से तैयार एमआईसी विभागों के बंटवारे की सूची को अंतिम सहमति प्रदान करेंगे।



मामले में क्या कहती हैं निगमाध्यक्ष
निर्वाचन पश्चात लगातार अवकाश होने एवं विशेष मुहूर्त नहीं होने से निगम अध्यक्ष कक्ष में नहीं बैठी। पर्वाधिराज पर्यूषण बाद शहर विधायक चेतन्य काश्यप भी बाहर से आ जाएंगे। विधायक काश्यप की मौजूदगी में कार्यभार संभालेंगे। – मनीषा मनोज शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष-रतलाम




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