
उज्जैन/रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। होली का पर्व इस वर्ष प्रदेश में सबसे पहले उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगा, जहां परंपरा के अनुसार संध्या आरती के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका दहन किया जाएगा। वहीं रतलाम (Ratlam) जिले में भी 150 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारी और होली के सामान से रौनक बढ़ गई है।
महाकालेश्वर मंदिर में संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को प्रतीकात्मक रूप से एक किलो हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद मंदिर परिसर में गोबर के उपलों से बनी होलिका का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दहन किया जाएगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुरक्षा कारणों से इस बार भी आम श्रद्धालुओं को होलिका दहन स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं होगी। पूर्व में हुई आग की घटना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम के दौरान संभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
रतलाम में 150 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन
रतलाम (Ratlam) शहर और जिलेभर में 150 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। होली को लेकर बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, पिचकारियों और खिलौनों से सज गए हैं। इस बार बाजार में हिंदू संस्कृति की झलक दिखाने वाली विशेष पिचकारियां आकर्षण का केंद्र हैं। हनुमानजी की गदा, त्रिशूल और सांप की बीन के आकार की पिचकारियां बच्चों को खूब पसंद आ रही हैं। होली को लेकर पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
धुलेंडी पर महाकाल का विशेष शृंगार और भस्म आरती
धुलेंडी के दिन महाकाल मंदिर में तड़के सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले भगवान महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद भांग और चंदन से विशेष शृंगार किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पं. आशीष शर्मा के अनुसार महाकाल मंदिर में सबसे पहले होली मनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसमें भगवान को प्रतीकात्मक रूप से गुलाल अर्पित किया जाता है।
3 मार्च से बदलेगा महाकाल की आरती का समय
महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में बदलाव होता है। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय तय किया जाता है। इस बार 3 मार्च से भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा और शरद पूर्णिमा तक यही क्रम चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन आरतियों के समय में बदलाव किया जाएगा।
ग्रहण के दौरान रहेंगे विशेष नियम
ग्रहण के सूतक काल में मंदिर के पट खुले रहेंगे, लेकिन नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की शुद्धि कर पुनः पूजा-अर्चना और आरती की जाएगी।
मंदिर परिसर में रंग-गुलाल लाने पर प्रतिबंध
श्रद्धालुओं को रंग या गुलाल लेकर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। पुजारी, कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी रंग लेकर प्रवेश नहीं करेंगे। सभी प्रवेश द्वारों पर कड़ी जांच की जाएगी। मंदिर परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से शांति और श्रद्धा के साथ होली मनाने की अपील की है।
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