
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। हार्टफुलनेस (Heartfulness) संस्था के वैश्विक मार्गदर्शक और पद्म भूषण से सम्मानित कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ ने कहा कि जैनत्व सभी धर्मों की मूल भावना को अभिव्यक्त करता है। तीर्थंकर ऋषभदेव द्वारा प्रवर्तित आध्यात्मिक परंपराओं ने मानवता को ध्यान और आत्मानुभूति का मार्ग दिखाया है।
रतलाम में हार्टफुलनेस (Heartfulness) केंद्र के सहयोग से श्रीजी पैलेस में तीर्थंकर ऋषभदेवजी द्वारा प्रवर्तित प्राणाहुति आधारित ध्यान अनुभव का विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर ‘दाजी’ ने उपस्थित लोगों को ध्यान की विशिष्ट अनुभूति कराते हुए उसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
ध्यान और आध्यात्म का गहरा संबंध

सत्र के पूर्व अपने संबोधन में ‘दाजी’ ने कहा कि किसी भी सिद्धांत या अभ्यास को अपनाने से पहले उसका बार-बार परीक्षण करना चाहिए और जब उसकी सच्चाई का अनुभव हो जाए तो उसे पूरी निष्ठा से जीवन में उतार लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि चेतना की विभिन्न अवस्थाओं को समझते हुए ध्यान को निर्विकार भाव से अपनाना जरूरी है। उनके अनुसार सुबह का समय ध्यान के लिए, शाम का समय प्रतिक्रमण के लिए और रात्रि का समय प्रार्थना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। ‘दाजी’ ने कहा कि भगवान ने स्वयं ध्यान के माध्यम से केवल्य प्राप्त किया और यही संदेश दिया कि मनुष्य भी ध्यान के द्वारा आत्मबोध तक पहुंच सकता है। हालांकि इसके लिए पहले धर्म और आध्यात्म के अंतर को समझना आवश्यक है। धर्म जहां मान्यताओं का मार्ग दिखाता है, वहीं आध्यात्म अनुभूति का मार्ग प्रशस्त करता है।
रतलाम के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर-मंत्री काश्यप
कार्यक्रम की शुरुआत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और वर्ल्ड जैन कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन चेतन्य काश्यप ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि ‘दाजी’ का रतलाम आगमन शहर के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि जैन तीर्थंकरों ने जिस ध्यान परंपरा के माध्यम से केवल्य प्राप्त किया, ‘दाजी’ उसी आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक समय में आगे बढ़ा रहे हैं। जैन दर्शन के प्रति उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणादायक है।
शिवगढ़ क्षेत्र में किया जा रहा वन विकास कार्य
मंत्री काश्यप ने बताया कि रतलाम के शिवगढ़ क्षेत्र में हार्टफुलनेस संस्था द्वारा लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में वन विकास का कार्य किया जा रहा है, जो प्रकृति संरक्षण और जीवदया की भावना को मजबूत करता है। जैन दर्शन में वर्णित 84 लाख जीवों की अवधारणा के अनुरूप यह प्रयास प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
‘होली तीर्थंकर्स’ पुस्तक का हुआ स्थानीय विमोचन
कार्यक्रम के दौरान ‘दाजी’ और श्री बी. रतिनासबापथी द्वारा लिखित पुस्तक ‘होली तीर्थंकर्स — इन द लाइट ऑफ हार्टफुलनेस’ (Heartfulness) के हिंदी संस्करण ‘पुण्यात्मन् तीर्थंकर और हार्टफुलनेस’ का स्थानीय विमोचन मंत्री चेतन्य काश्यप ने किया। विमोचन के बाद ‘दाजी’ ने पुस्तक की प्रतियां जैन समाज के श्रीसंघ प्रमुखों अशोक चौटाला, विनोद मेहता, हिम्मत गेलड़ा, अजय खिमेसरा, प्रकाश मूणत, सुशील छाजेड़, अशोक चौपड़ा और ओम अग्रवाल को भेंट की।
डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन और आभार
कार्यक्रम से पहले हार्टफुलनेस (Heartfulness) संस्था और ‘दाजी’ के कार्यों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम का संचालन विकास शैवाल ने किया, जबकि आभार युवा संगीतकार सिद्धार्थ काश्यप ने माना।
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