असीम राज पांडेय, रतलाम। रात्रि में बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिए कप्तान अलर्ट हैं। ज्वाइनिंग के बाद से कप्तान ने थाना और चौकियों की मुस्तैदी परखने के लिए आकस्मिक पहुंच रहे है। जहां अमला मुस्तैद नहीं मिलता वहां हिदायत के साथ समझाइश भी दी जा रही है। इसके अलावा कप्तान के निरीक्षण में घोर लापरवाही स्टेशन रोड थाना अंतर्गत सालाखेड़ी चौकी पर देखने को मिली। कप्तान जब अचानक देर रात यहां पहुंचे तो चौकी प्रभारी खर्राटे लेते नजर आए और चौकी बंद करने वाला आरक्षक कप्तान की नाराजगी का शिकार हुआ। फलस्वरूप चौकी प्रभारी को शोकॉज नोटीस और चौकी बंद करने वाले आरक्षक को एक घंटे चौकी के बाहर खड़े रहने की सजा सुनाई गई। महकमें में चर्चा जोरों पर है कि कप्तान ने अमले की नींद उड़ा रखी है। इसके विपरित चौराहों पर चर्चा है कि कप्तान ने पहली बार अमले को नौकरी सिखाई है। तत्कालीन कप्तान बंगले पर आराम फरमाकर सिर्फ अधीनस्थों से ही जिला चलवाते थे। ये अंदर की बात है… कि नए कप्तान ने सुस्त और लापरवाह अमले को अलर्ट का पाठ ऐसा पढ़ाना शुरू कर दिया कि इन्हें ड्यूटी पर सोना तो दूर सुस्ताने की भी राहत नहीं दे रखी है।
समयपाल की पॉवर, करोड़ों की फाइल पर हस्ताक्षर
आमजन को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला नगर निगम में नियम विपरित कार्यों पर किसी का ध्यान नहीं है। आमजन के समय-सीमा पर कार्य नहीं होने की शिकायतें आम हो चुकी है। लेकिन अब यहां पर तृतीय श्रेणी और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी फाइलों पर हस्ताक्षर कर नियम तोड़ने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला उपायुक्त के करीबी समयपाल का सामने आया है। हालांकि उपायुक्त अभी प्रभारी आयुक्त हैं, परंतु इनके करीबी समयपाल ही उपायुक्त का पूरा काम काज संभाल रहे हैं। उपायुक्त के वृहदहस्त के चलते समयपाल को इतना पॉवर है कि यह समाचार पत्रों में जारी होने वाली विज्ञप्तियों के अलावा महत्वपूर्ण फाइलों पर फॉर कर सहमती जारी कर रहे हैं। मामला नगर निगम में काफी चर्चा में है कि अब तक किसी भी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर बगैर फाइल आगे नहीं बढ़ती थी, लेकिन उपायुक्त के करीबी इस समयपाल के हस्ताक्षर के बाद फाइल दौड़ रही है जो कि नियम विपरित है। ये अंदर की बात है…कि नगर निगम में ट्रिपल इंजन की फूलछाप सरकार कितने भी कसावट के दावें भर लें, लेकिन प्रशासकीय मशीनरी अपने आगे किसी की नहीं सुन रही है। समयपाल के करोड़ों की फाइल पर हस्ताक्षर करने का मामला जल्द ही जिम्मेदारों के सामने पेश हो सकता है। इसमें हस्ताक्षर करने वाले समयपाल के अलावा उपायुक्त पर भी गाज गिरना अब तय है।
किसान नेता ने तोड़ी लाइन, निकाल दी हैकड़ी
हाथछाप के प्रदेश मुखिया के जिला मुख्यालय पर प्रवेश से पूर्व पार्टी के एक नेता ने जोश-जोश में हंगामें को जन्म दिया। माजरा कुछ ऐसा है कि हाथ छाप के प्रदेश मुखिया के आने से पहले सत्कार और अगवानी के लिए सालाखेड़ी पर खड़े किसान नेता को वाहन में सीएनजी भरवाने की याद आई। किसान नेता आनन-फानन में पंप पहुंचे और उन्होंने नियम विपरित लाइन तोड़ते हुए गाड़ी खड़ी कर दी। पंप पर पहले से वाहन लेकर खड़े मालिकों ने पंप कर्मचारी और मालिकों के सामने आपत्ति ली। मामला शांत होता कि किसान नेता जोश-जोश में कर्मचारी से भिड़ गए। मामला काफी गरमाया। काफी नौंक-झौंक और टकराव के बाद किसान नेता को गलती को अहसास हुआ, इसके बाद मामला शांत हुआ। हालांकि मामला सोशल मीडिया पर भी आ गया। हाथछाप के मुखिया के आने के पहले ही जब स्वागत में खड़े शहरी से लेकर सैलाना तक के नेताओं के पास यह खबर पहुंच गई तब हर कोई वाक्या जानने की कोशिश में इधर-उधर फोन लगाने लगे। आखिर हुआ क्या। हालांकि जब किसान नेता का नाम सामने आया तो कई तो अंदर ही अंदर गदगद भी हो गए। ये अंदर की बात है… कि हाथछाप पार्टी के यह किसान नेता वहीं हैं जो कि समय-समय पर अपने सफेद कुर्ते की तरह समय की नजाकत को देखते हुए अपना रूप भी बदल लेते है।
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