रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
मध्यप्रदेश के चिकित्सा स्तर को बेहतर बनाने अब डॉक्टरों की फौज यात्रा निकालने का मूड बना चुकी है। विभिन्न चिकित्सक संगठनों का आरोप है कि लगातार विरोध प्रदर्शन करने के बाद भी उनकी मांगे नहीं मानी जा रही। ऐसे में अब डॉक्टरों का बड़ा धड़ा आखरी चेतवानी के रूप में यात्रा निकालेगा। इसके बाद भी अगर सुनवाई नहीं हुई तो फरवरी से काम बंद? डॉक्टरों की यह यात्रा शुक्रवार को ग्वालियर से शुरू होगी। जो मुरैना, अम्बाह, भिंड, दतिया, शिवपुरी, ओरछा, निवारी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, मंडला, जबलपुर, कटनी, सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार, रतलाम, मंदसौर, उज्जैन, शाजापुर, देवास, इंदौर, ब्यावरा, विदिशा, सागर, दमोह, रायसेन होते हुए मध्य प्रदेश के 38 जिलों के सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पतलों एवं 13 मेडिकल कॉलेजों से गुजरते हुए भोपाल पहुंचेगी।
म.प्र. शासकीय/स्वशासी चिकित्सक महासंघ के बैनर तले यह यात्रा निकाली जा रही है। चिकित्सक महासंघ के अध्यक्ष डॉ. प्रवीणसिंह बघेल ने बताया कि देश की चिकित्सा स्थिति का सूची में लगातार निचले पायदान में आना, चिकित्सकों का शासकीय चिकित्सालयों/मेडिकल कॉलेजों से नौकरी छोड़ना, हर स्तर (गांव, ब्लॉक, तहसील, जिला, मेडिकल कॉलेज) पर विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, उचित इलाज से वंचित प्रदेश की जनता, पिछले 20 वर्षों से कार्य स्थल में उचित चिकित्सीय आधारभूत संसाधनों की कमी एवं करियर उन्नयन से वंचित व असंतुष्ट चिकित्सीय संवर्ग तथा प्रदेश के गौरवशाली चिकित्सा संस्थानों में नॉन टेक्निकल (गैर चिकित्सीय) प्रशासकों का हस्तक्षेप हो रहा है। लगातार हो रहा उपेक्षा के चलते म.प्र. शासकीय/स्वशासी चिकित्सक महासंघ ने विगत 7 जनवरी को समस्त संबंधित उच्च प्रशासनिक अधिकारियों एवं विभागवार मंत्री को बातचीत कर 1 महीने का समय दिया था। मगर उस पर किसी ने कोई संज्ञान नहीं लिया। पिछले 10 सालो से विभिन्न चिकित्सीय संगठनों ने भी इसके लिए प्रयास किए। यात्रा के बाद भी अगर कोई हल ना निकला तो फरवरी महीने में डॉक्टर अपना काम बंद कर प्रदेश व्यापी आंदोलन करेंगे।
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