

ग्वालियर/रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्यप्रदेश के अब तक की सबसे बड़ी 21.05 करोड़ रुपए की ठगी जांच में देशभर में फैले बड़े बैंकिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है। साइबर ठगों ने ठगी की रकम को एक-दो खातों में रखने के बजाय 15 से ज्यादा राज्यों के 20 हजार से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर किया। पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये खाते कमीशन के बदले ठगों को उपलब्ध कराए गए म्यूल अकाउंट थे।
जांच के मुताबिक ठगी की रकम को कई स्तरों यानी लेयर में ट्रांसफर किया गया, जिससे पैसे की ट्रेल को पकड़ना मुश्किल हो जाए। रकम कन्याकुमारी से कश्मीर और गुजरात से कोलकाता तक अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाई गई। शुरुआती जांच में करीब 35 प्रतिशत राशि दक्षिण भारत के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई है।
अंकित रतलाम में संचालित करता था गैरेज
इस मामले में राज्य साइबर जोन पुलिस ने एक सप्ताह पहले शाजापुर के भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय और रतलाम (Ratlam) का मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया था। शातिर आरोपी अंकित वर्मा रतलाम (Ratlam) में कार मरम्मत का गैरेज भी संचालित करता था। जांच में सामने आया कि जगदीश मालवीय के बंधन बैंक खाते में पिछले कुछ महीनों में 2.93 करोड़ रुपए आए थे। इनमें से 50 लाख रुपए CA अशोक विजयवर्गीय से हुई ठगी के थे, जबकि 2.43 करोड़ रुपए अन्य संदिग्ध ठगी के बताए जा रहे हैं।पूछताछ में जगदीश ने पुलिस को बताया कि उसने अपना बैंक खाता रतलाम (Ratlam) निवासी अंकित वर्मा को किराए पर दिया था और इसके बदले उसे कमीशन मिलता था। पुलिस के अनुसार, जगदीश ने पूछताछ में यह भी बताया कि वह इसी तरह मिलने वाले पैसों से विधायक का चुनाव लड़कर MLA और आगे मंत्री बनने का सपना देख रहा था। पुलिस अब उसके खाते में आए बाकी 2.43 करोड़ रुपए के स्रोत की जांच कर रही है।
76 खातों में 106 बार भेजे रुपए
पुलिस जांच में पता चला है कि अशोक विजयवर्गीय ने ठगों के बताए 76 बैंक खातों में 106 बार ट्रांजेक्शन किए थे। इसके बाद रकम करीब 15 अलग-अलग लेयर से गुजरते हुए 20 हजार से ज्यादा बैंक खातों तक पहुंची। साइबर पुलिस अब इन खातों और प्रत्येक लेनदेन की कड़ी जोड़ने में जुटी है।
ऐसे फंसे थे 70 वर्षीय CA
पुलिस के मुताबिक 70 वर्षीय सीनियर CA अशोक विजयवर्गीय के साथ ठगी की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी। उनके मोबाइल पर एक अनजान भारतीय नंबर से मैसेज आया। महिला ने अपना नाम ‘दिव्या सिंह’ बताते हुए खुद को निवेश सलाहकार बताया। उसने USDT क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश से कई गुना मुनाफा मिलने का झांसा दिया। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग नंबरों और विदेशी नंबर के जरिए उनसे संपर्क किया। उन्हें ‘Tradecboeus’ नाम के फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराया गया। पोर्टल पर शेयर और ट्रेडिंग का ग्राफ इस तरह दिखाया जाता था कि निवेशक को लगातार मुनाफा होने का भरोसा बना रहे।अशोक विजयवर्गीय ने ठगों के झांसे में आकर अलग-अलग खातों में 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपए लगा दिए। जब उन्होंने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने इनकम टैक्स के नाम पर उनसे करीब 10 करोड़ रुपए और जमा करने को कहा। इसी दौरान उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
विदेशी IP से कंट्रोल हो रहा था फर्जी पोर्टल
जांच में सामने आया कि ठगों ने निवेशकों को फंसाने के लिए पूरा फर्जी वेब पोर्टल तैयार किया था। वेबसाइट पर ट्रेडिंग गतिविधि और मुनाफा वास्तविक दिखाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस के अनुसार यह पोर्टल विदेशी IP से कंट्रोल किया जा रहा था।
दोनों आरोपी जेल भेजे गए
राज्य साइबर जोन पुलिस ने मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों से करीब तीन दिन तक पूछताछ की गई। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। ग्वालियर डीएसपी राज्य साइबर जोन संजीव नयन शर्मा ने बताया कि मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। पुलिस ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
Website Design By
KAMAKSHI WEB
CONTACT : +91-9753910111


