असीम राज पांडेय, रतलाम। रतलाम की फूलछाप राजनीति में प्रभारी के आगमन के साथ एक अतिरिक्त गुट का इजाफा हो चुका है। अभी तक गिनती के तीन गुट रतलाम की फूलछाप पार्टी में सक्रिय थे, लेकिन प्रभारी के आगमन के साथ चौथे गुट ने रतलाम की राजनीति में पैर फैला दिए हैं। प्रभारी का पहला गरमाहट भरा रतलाम आगमन इन दिनों काफी चर्चा में है। प्रभारी ने एक तरफ जहां शहर माननीय के रतलाम को संभाग बनाने वाले प्रोजेक्ट पर अपना ठप्पा लगाया, वहीं दूसरी तरफ तैयारी कर रतलाम आए प्रभारी ने शहर को महानगर बनाने वाले प्रोजेक्टों की हवा निकाल दी। ये अंदर की बात है… कि जब प्रभारी ने नगर सरकार के माननीय से प्रोजेक्ट पर चर्चा शुरू की तो इस दौरान टॉपिक साड़ी मार्केट का सामने आया। जमीनी जानकारी लेकर पहली बार रतलाम आए प्रभारी ने नगर सरकार माननीय से पूछा कि साड़ी मार्केट शहर से 7 किलोमीटर दूर बनाकर किसे फायदा पहुंचाना चाह रहे हो? साड़ी का मार्केट बना रहे हो या गोदाम। नगर सरकार के माननीय बगले झांकते तब तक फूलछाप के जिला मुखिया ने बीच में कहा कि यह प्रोजेक्ट शहर माननीय द्वारा प्रस्तावित है। प्रभारी ने अपने चश्में से झांकते हुए कहा कि शहर माननीय से हम बात कर लेंगे। इतना ही नहीं जब ट्रांसपोर्ट नगर निर्माण की प्रोग्रेस की बात आई तो नगर माननीय ने फंड की कमी बता दी। प्रभारी तो अनुभवी ठहरे। सालों की राजनीति का बखूबा ज्ञान भी। उन्होंने नगर माननीय से भोपाल आकर फंड की कमी की मांग रखने के बारे में पूछ लिया। तब नगर माननीय की बोलती बंद हो गई।

जागते रहो…जागते रहो…सो रही पुलिस
रतलामवासियों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद तैयार रहना पड़ेगा। यह हम नहीं रतलाम की जनता चौराहे-चौराहे पर चर्चा में कह रही है। शहर में जुए-सट्टे की बाढ़ आने के बाद अनगिनत सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि क्षेत्र की पुलिस क्या कर रही है? बाजना बस स्टैंड में हाल का एक वीडियो उजागर हुआ, जिसमें मटका और मोटर कोडवर्ड में हिस्ट्रीशीटर सटोरिया और उसके गुर्गे सट्टा लिखते नजर आए। क्षेत्र की पुलिस संरक्षण बगैर बदमाशों में हिम्मत नहीं कि यह बीच बाजार में स्टूल लगाकर बेखौफ सट्टे की पर्चियां भर लें। असामाजिक तत्वों की आए दिन बदमाशी और चोरी की वारदात पर अंकुश लगाने में नाकाम क्षेत्र की पुलिस अब अवैध धंधों को बढ़ावा देने में जुटी है। इधर कप्तान की टीम में शामिल कुछ कर्मचारी साहब और अपने नंबर बढ़ाने के लिए अड्डों पर दबिश देकर फोटो छपवाकर छवि सुधारने में लगे हैं। ये अंदर की बात है… कि क्षेत्र की पुलिस में आखिर हिम्मत कहां से आई कि वह कप्तान के सख्त निर्देश के बावजूद बेखौफ क्षेत्रों में जुए-सट्टे का अवैध कार्य धड़ल्ले से चलवा सके। चर्चा है कि तस्वीर तो एक ही है लेकिन जनता को उसे अलग-अलग दिशा के साथ अलग अंदाज में दिखाई जा रही है।
साप्ताहिक डायरी से कर रहे टारगेट बैस काम
त्योहार के मौसम में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाला विभाग एकाएक कुंभकर्णी नींद से जागा। वर्ग विशेष के झंडों ने ऐसी बवाल मचाई कि जिम्मेदारों की चौंककर नींद खुल गई। चौकी पर दिनभर गहमागहमी के साथ गरमा गरमी ने उजागर किया कि थानों और चौकियों में क्षेत्र में वर्ग विशेष तो ठीक कौन बदमाश अभी क्या कर रहा, इसकी पड़ताल की प्रथा बंद हो गई। मंगलवार की दोपहर में वर्ग विशेष के झंडे ने ऐसा शोर मचाया कि अफसरों ने थाने और चौकी के साहबों की आंखों खुलवाकर अचानक क्षेत्र की शांति समिति की बैठक लेने का फरमान जारी किया। ये अंदर की बात है…कि गुंडे बदमाशों की कुंडली तैयार करने वाले अब पुलिसिंग नही बल्कि टारगेट बैस (डायरी सिस्टम) में उलझकर नौकरी के नाम खानापूर्ति कर रहे हैं। महकमे में चर्चा है कि बेहतर कार्य करते हैं तो हमे नोकरी का पार्ट याद दिलाया जाता है, लेकिन साप्ताहिक डायरी में कमी रह जाती है तो तत्काल निंदा दी जाती है। ऐसे में हम क्यों भाग दौड़ कर भेजा खपाए।
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