
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। साढ़े 9 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के दोषी को रतलाम (Ratlam) कोर्ट ने दोहरे आजीवन कारावास की सजा दी है। फैसले में टिप्पणी करते हुए विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि पीड़िता की उम्र 9 साल 7 महीने है और अभियुक्त 32 साल का है। इसने अपनी बेटी की उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर समाज की आत्मा को झकझोर दिया है। बच्ची सहित नानी और उसके माता-पिता के बयान हुए। एक भी गवाह होस्टाइल नहीं हुआ। बच्ची ने बेबाकी से बयान दिए और क्रॉस सवालों के स्पष्ट जवाब दिए, जो अपराधी की सजा का मुख्य आधार बने।

कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह कल्पना करना भी असंभव है कि घटना के समय बालिका पर क्या गुजरी होगी। देश में 12 साल से कम उम्र की बालिकाओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उनके साथ दुष्कर्म की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। अपराधी ने बच्ची के साथ जघन्य तरीके से कृत्य किया है, इसलिए वह किसी भी तरह से दया का पात्र नहीं है।

सहायक निदेशक अभियोजन आशा शाक्यवार ने बताया कि जून 2023 की रात को साढ़े 9 साल की पीड़िता अपनी नानी के साथ घर के बाहर पलंग पर सो रही थी। रात 2 बजे नानी ने घर के सभी लोगों को उठाया और बताया कि बच्ची रो रही है। बच्ची ने परिजनों को बताया कि रात को मुझे कोई उठाकर घर के पीछे खेत में बिजली की डीपी के पास ले गया। वहां मेरी नींद खुली तो देखा कि सामने राजेंद्र सिंह पिता शंभू सिंह राजपूत था। उसने मेरे साथ गंदा काम किया। मैंने शोर मचाया तो उसने मुझे थप्पड़ मारे और गले पर भी मारा। पीड़िता ने यह भी बताया कि मेरे साथ गंदा काम करने वाले के हाथ पर भी राजेंद्रसिह गुदा हुआ था। उसने मुझे धमकी दी कि चुपचाप घर पर जाकर सो जाना। तूने किसी को बताया तो तुझे मार डालूंगा। पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसके मोबाइल में पोर्न फिल्में भी मिली थीं। घटना के विरोध में 13 जून को ग्रामीणों और महिलाओं ने कलेक्टोरेट में ढाई घंटे तक धरना दिया था। इसमें गांव की महिलाएं भी शामिल रही थीं।
एक भी गवाह नहीं हुआ होस्टाइल
पीड़िता वहां से भागकर आई और नानी को जब घटना बताई तब उन्होंने भी राजेंद्र सिंह निवासी बड़ोदिया को वहां से भागते हुए देखा। पीड़िता की स्थिति इतनी गंभीर थी कि 15 दिन अस्पताल में भर्ती रखना पड़ा। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो एक्ट गौतम परमार ने बताया कि कोर्ट ने धारा 5 एम सहपठित धारा 6 एवं 5 आई सहपठित धारा 6 में आजीवन कारावास की सजा देने से इसे दोहरा आजीवन कारावास माना गया है। साथ ही 27 हजार रुपए अर्थदंड और पीड़िता को 2 लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं।
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