
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्यप्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले के सैलाना और पिपलौदा क्षेत्र में संचालित शराब दुकानों के ठेकेदारों द्वारा समय पर आबकारी ड्यूटी एवं अन्य देय राशि जमा नहीं किए जाने के आरोप सामने आने से आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जुलाई 2026 माह में भी नियमों की अनदेखी के बावजूद जिम्मेदारों ने संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं की। मामले में वंदेमातरम् न्यूज ने सैलाना क्षेत्र के संबंधित अधिकारी सचिन भास्कर से मसले पर चर्चा कर सवाल पूछे तो वह निरुत्तर रहे। मुद्दे पर सहायक आयुक्त विकास मंडलोई ने मोबाइल रिसीव नहीं कर सवालों से बचने की कोशिश की।
आबकारी अधिनियम की माने तो प्रतिमाह की निर्धारित समय सीमा (पखवाड़े भर के भीतर) ठेकेदारों को निर्धारित ड्यूटी (राशि) समय सीमा में जमा कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद जिले के कई ठेकेदार नियमों का पालन नहीं करते हुए विलंब से राशि भरते हैं और जिले में कई ठेकेदार परमिट नहीं भरने के बावजूद दुकानों से बेखौफ दूसरे स्थानों की शराब विक्रय कर रहे हैं। इन तमाम विसंगतियों के बावजूद आबकारी विभाग का मौन रहना अब जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
राशि जमा नहीं होने के बावजूद कार्रवाई नहीं
जानकारी के अनुसार, शराब दुकानों के संचालन के लिए ठेकेदारों को शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार समय-समय पर ड्यूटी एवं अन्य शुल्क जमा करना होता है। यदि किसी कारणवश भुगतान में देरी होती है तो नियमानुसार संबंधित ठेकेदार का ठेका निरस्ती की प्रक्रिया के साथ नए सिरे से ऑनलाइन टेंडर का प्राबधान है , इसके बावजूद गत माह जून 2026 में कई शराब ठेकेदारों ने (प्रमुख रूप से सैलाना अन्तर्गत दो दुकान) की ड्यूटी राशि तीसरे दिन विलंब से भरी और पूरे मामले में जिम्मेदार राजपत्र में अंकित नियमों का मखौल उड़ाते नजर आए। इसके अलावा जुर्माना अथवा अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का भी प्रावधान है। लेकिन सैलाना और पिपलौदा क्षेत्र में यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं होने से विभाग की मूकदर्शिता के साथ गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
विभाग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल?
जानकारों का कहना है कि यदि किसी आम नागरिक या छोटे व्यापारी द्वारा सरकारी देय राशि समय पर जमा नहीं की जाती है तो उसके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई होती है, जबकि शराब ठेकेदारों के मामले में कथित तौर पर नरमी बरती जा रही है। इससे रतलाम आबकारी विभाग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शासन के नुकसान की कैसे होगी भरपाई ?
सूत्रों का दावा है कि कई बार देरी से भुगतान होने के बावजूद दुकानों का संचालन बिना किसी व्यवधान के जारी रहता है। यदि इन दावों में सच्चाई है तो यह जानना भी आवश्यक है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? शासन को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई किस प्रकार की गई ?
पारदर्शी जांच से सुलझेंगे जवाब
जानकारों का मानना है कि आबकारी विभाग को इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच करानी चाहिए। यदि किसी ठेकेदार ने निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन किया है तो उसके विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके और शासन के राजस्व हित सुरक्षित रह सकें। इसके अलावा सैलाना और पिपलौदा में संचालित शराब दुकानों की ड्यूटी भुगतान संबंधी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन-किन ठेकेदारों ने समय पर भुगतान किया और किन मामलों में विलंब हुआ तथा उन पर क्या कार्रवाई की गई।
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