
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। विश्व के सबसे गर्म शहरों में शामिल हो चुके रतलाम (Ratlam) को दीर्घकालिक रूप से हरित और शीतल बनाने के उद्देश्य से ‘त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान’ का शुभारंभ विधायक सभागृह, बरबड़ में आयोजित एक प्रेरक बैठक के साथ हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों, पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हर परिवार द्वारा कम से कम एक त्रिवेणी (पीपल, नीम और बरगद) लगाने तथा उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अभियान के पोस्टर का विमोचन किया गया तथा उपस्थित लोगों को त्रिवेणी रोपण का सामूहिक संकल्प भी दिलाया गया। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रतलाम-झाबुआ विभाग के संघ चालक तेजराम मांगरोदा, विभाग प्रचारक कृष्णकांत पांडेय तथा हार्टफुलनेस संस्था के डॉ. नीलेश शुक्ला मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
भारतीय संस्कृति प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देती है : तेजराम मांगरोदा
संघ चालक तेजराम मांगरोदा ने कहा कि जिस प्रकार शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन बीमारी का कारण बनता है, उसी तरह जल, वायु और अग्नि का असंतुलन प्रकृति में संकट पैदा करता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति अपने संतुलन को स्वयं स्थापित करती है, जिसका परिणाम बाढ़, भूकंप या महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ एकात्म स्थापित करने वाली रही है। भगवान श्रीकृष्ण से लेकर विभिन्न देवी-देवताओं और जैन तीर्थंकरों तक, सभी का जीवन वृक्षों और जीव-जंतुओं से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण का सीधा प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य, विचार और व्यवहार पर पड़ता है। मांगरोदा ने बच्चों को राजस्थान की अमृता देवी जैसे प्रकृति-रक्षकों के बलिदान की प्रेरक कहानियां सुनाने और महर्षि कण्व व शकुंतला के प्रकृति प्रेम से सीख लेने का आह्वान करते हुए अभियान से जुड़ने की अपील की।
पौधे को वृक्ष बनाना ही अभियान की सफलता : कृष्णकांत पांडेय
विभाग प्रचारक कृष्णकांत पांडेय ने कहा कि केवल संकल्प लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे विकल्पहीन बनाकर पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने आम के बौर का उदाहरण देते हुए कहा कि हर संकल्प सफल नहीं होता, सफलता उन्हीं को मिलती है जो अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनाना है। रतलाम की जनसंख्या के अनुरूप त्रिवेणी रोपण और उसके संरक्षण का लक्ष्य तय किया गया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। पांडेय ने नागरिकों से अपने पूर्वजों की स्मृति, धार्मिक एवं मांगलिक अवसरों तथा पारिवारिक आयोजनों को चिरस्थायी बनाने के लिए त्रिवेणी लगाने का आह्वान भी किया।
पीपीटी और प्रस्तुति के माध्यम से समझाया त्रिवेणी का महत्व
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने भारत माता एवं त्रिवेणी (पीपल, नीम और बरगद) के पूजन से की। अतिथियों का परिचय देवाशीष पौराणिक और डॉ. हितेश पाठक ने कराया। पर्यावरण मित्र अशोक पाटीदार ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में वृक्षों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने त्रिवेणी रोपण के धार्मिक, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और वास्तुशास्त्रीय महत्व की जानकारी दी। इस दौरान रतलाम में बढ़ते तापमान और त्रिवेणी रोपण की आवश्यकता पर आधारित विशेष वार्तालाप का भी प्रसारण किया गया।
जनभागीदारी बढ़ाने के लिए आए कई महत्वपूर्ण सुझाव
बैठक में अभियान को व्यापक जनआंदोलन बनाने के लिए कई सुझाव सामने आए। इनमें स्कूलों में त्रिवेणी रोपण के प्रति जागरूकता अभियान चलाने, वार्ड और मोहल्ला स्तर पर समितियों का गठन करने, व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं और सुविधाओं से त्रिवेणी रोपण को जोड़ने जैसे सुझाव शामिल रहे।
बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों की रही सहभागिता
कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। संचालन पत्रकार अदिति मिश्रा ने किया। आयोजन में मातृशक्ति, संत समाज, प्रकृति-प्रेमी, स्वयंसेवक, धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
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