
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश (MP) की सबसे बड़ी 21.05 करोड़ के साइबर फ्रॉड (Cyber fraud) के मामले में रतलाम (Ratlam) के मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को ग्वालियर राज्य साइबर जोन पुलिस ने सागर से गिरफ्तार किया है। अंकित कलेक्शन और एपीके फाइल हैंडलिंग का काम संभालता था। अंकित टेलीग्राफ पर खाताधारकों से संपर्क कर खातों को किराए पर लेता था। इन सभी खातों को बिहार में बैठकर ठग गिरोह ऑपरेट करता था।

अंकित फर्जी खाते, सिम चार्टर्ड एकाउंटेंट से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 21.5 करोड़ की ठगी के मामले में पुलिस ने आरोपी एकाउंट हैंडलर अंकित वर्मा निवासी रतलाम को गिरफ्तार किया है। अंकित मैकेनिकल से इंजीनियर है। मामले में शाजापुर के भाजपा नेता व जनपद सदस्य जगदीश मालवीय को पुलिस पहले ही पकड़ चुकी है। जगदीश के खाते को अंकित ने ही किराए पर लेकर ठगों को दिया था। जगदीश भाजपा के टिकट पर विधायकी की तैयारी कर रहा था। चुनाव में ज्यादा रुपया खर्च होता है इसीलिए जब अंकित ने बिना काम के बैंक खाते किराए पर देकर ज्यादा रुपया कमाने का लालच दिया तो उसने अपना खाता किराए पर दे दिया था। जगदीश इसके जरिए विधानसभा चुनाव में खर्चे के लिए फंड इकट्ठा करना चाह रहा था। जगदीश के खाते में 11 ठगी का लगभग 2 करोड़ रुपया पहुंचा था। 11 ठगी के मामले में जगदीश की अलग-अलग राज्यों की पुलिस को तलाश है। राज्य साइबर सेल प्रभारी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को एकाउंट हैंडलर अंकित वर्मा निवासी रतलाम के सागर में होने की सूचना मिली थी। इस पर टीम को सागर भेजकर घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया।
शातिर इंजीनियर का यह था खेल
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इस पूरे फेक वेब पेज को विदेश की आईपी एड्रेस से कंट्रोल किया जा रहा था। फिर गिरोह के सदस्य मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जाकर लोगों के फोन में एक एपीके फाइल एक्टिवेट करा देते थे। उस फोन पर आने वाले सभी बैंक ओटीपी अपने आप ऑटो-फॉरवर्ड होकर मुख्य अकाउंट हैंडलर अंकित वर्मा के पास चले जाते थे। इसके बाद अंकित बैंक खातों और फर्जी सिम कलेक्शन के जरिए रुपयों को ठिकाने लगाता था।
फर्जी वेब पोर्टल से की शातिर ने सबसे बड़ी ठगी
फरियादी चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को वाट्सएप के माध्यम से ट्रेडबाइस नाम के एक कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर इन्वेस्टमेंट करने का झांसा दिया। आरोपियों ने इस ठगी के लिए फर्जी वेब पोर्टल तैयार किया था। जब फरियादी इस पर रुपए इन्वेस्ट करता, तो उसे वेब पेज पर ही एमाउंट और बढ़ता-घटता हुआ यानी फर्जी ट्रेड्स ग्राफ दिखाया जाता था। इस फर्जी ग्राफ को देखकर फरियादी को लगता था कि उसे सचमुच प्रॉफिट हो रहा है, जिसके झांसे में आकर उसने 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपए की बड़ी रकम इन्वेस्ट कर दी। लेकिन जब उन्होंने रुपए निकालने का प्रयास किया तो उनसे इनकम टैक्स के रूप में 10 करोड़ रुपए मांगे गए। जिससे उन्हें ठगी की आशंका हुई और उन्होंने शिकायत दर्ज करवाई।
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