
इंदौर/रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश (Mp Police) के इंदौर के खजराना थाने के पूर्व थाना प्रभारी और वर्तमान में राज्य साइबर सेल में पदस्थ इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच पूरी हो गई है। इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बड़ा फैसला लिया है। पॉकेट गवाह मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा को निरीक्षक (इंस्पेक्टर) पद से हटाकर उप निरीक्षक (एसआई) बना दिया है।
इंदौर पुलिस कमिश्नर ने जारी किया आदेश
विभागीय जांच में कई आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस कमिश्नर ने यह आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद दिनेश वर्मा का पद उनके बैच के अधिकारियों से काफी पीछे हो गया है। उनके साथ भर्ती हुए कई अधिकारी अब डीएसपी के पद पर पहुंच चुके हैं।
पॉकेट गवाह मामले में हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक दिनेश वर्मा 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक खजराना थाने में थाना प्रभारी रहे। इसी दौरान दर्ज हुए कई मामलों की जांच में एक ही व्यक्ति को बार-बार गवाह बनाए जाने का मामला सामने आया। जांच में पता चला कि इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम को 742 मामलों में गवाह बनाया गया जबकि नवीन पुत्र रामचंद्र चौहान को 504 मामलों में गवाह के रूप में शामिल किया गया।
गंभीर मामलों में भी इन दो को ही फर्जी बनाया गवाह
विभागीय जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 और 2023 के बीच हत्या, धोखाधड़ी, जानलेवा हमला, कूटरचना, छेड़छाड़, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, आबकारी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों में भी इन्हीं दोनों व्यक्तियों को गवाह बनाया गया। ऐसे करीब 333 प्रकरणों में दोनों के नाम गवाह के रूप में दर्ज मिले। इसके अलावा 742 जब्ती पत्रकों पर भी दोनों के हस्ताक्षर पाए गए जिससे जांच अधिकारियों को संदेह हुआ।
गवाहों के फर्जी साइन का जिक्र
जांच रिपोर्ट में एक मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। अपराध क्रमांक 324 में विवेचक द्वारा गवाह इरशाद और गणेश ठाकुर के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने की बात सामने आई। पुलिस कमिश्नर के आदेश के अनुसार इससे आरोपियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई। इस मामले की जांच तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर ने की थी। जांच पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी गोपनीय रिपोर्ट तत्कालीन डीसीपी को भेजी थी। इसके आधार पर दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।
आठ पन्नों का है आदेश
पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने अपने आठ पन्नों के आदेश में दिनेश वर्मा के कामकाज पर गंभीर टिप्पणी भी की है। आदेश में कहा गया है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का ईमानदारी और पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन नहीं किया। आदेश में पुलिस रेगुलेशन के पैरा 64(2) और 64(3) के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। साथ ही पैरा 582 का हवाला देते हुए कहा गया कि थाना प्रभारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के काम के लिए भी जिम्मेदार होता है लेकिन इस मामले में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया।
लगातार हो रही है कार्रवाई
गौरतलब है कि पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के कार्यकाल में विभागीय अनुशासन को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले विजय नगर थाने के तत्कालीन टीआई रवींद्र सिंह गुर्जर और निरीक्षक अजय वर्मा को भी निरीक्षक से डिमोशन कर एसआई बनाया जा चुका है। हाल ही में खजराना थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) कमल सिंह गुर्जवार को करीब 400 दिन तक एक शिकायत लंबित रखने के मामले में डिमोशन कर आरक्षक बना दिया गया।
टीआई से लेकर आरक्षक भी कम शातिर नहीं
शातिर आरक्षक कमल सिंह का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। भंवरकुआं थाने में दर्ज एक मामले में उस पर कथित तौर पर आरोपियों पर दबाव बनाकर बयान लेने और दो पत्रकारों को फर्जी तरीके से आरोपी बनाने के आरोप लगे थे। उस मामले में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने कमल सिंह को लाइन अटैच भी किया था। इसके अलावा खजराना में हुए सड़क दुर्घटना और सदर बाजार क्षेत्र के कुछ मामलों में भी उसका नाम विवादों में आया था।
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