

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले के आदिवासी बाजना क्षेत्र के मानपुरा में ग्रामीणों की मौजूदगी में पैर बंधे घायल तेंदुए और कुछ देर बाद उसकी मौत के वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वंदेमातरम् न्यूज (vandematram News) ने ‘तेंदुए की मौत : हादसा या हत्या?’ शीर्षक से मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए रतलाम वन मंडल अधिकारी (DFO) सहित मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। अब मामले में DFO ने बाजना रेंजर से प्रतिवेदन मांगा है।
घायल तेंदुए के मामले में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

बाजना थाना क्षेत्र के मानपुरा में घायल तेंदुए की मौत के मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत तेंदुए के पैर किसने बांधे? वह किन परिस्थितियों में घायल हुआ और ग्रामीणों की भीड़ तक कैसे पहुंचा? इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल वन विभाग के पास नहीं है। मामले में अब मैदानी अमले द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर सूचना नहीं देने के पहलू को भी संज्ञान में लिया गया है। DFO ने कथित लापरवाही को लेकर बाजना क्षेत्र के रेंजर से प्रतिवेदन मांगा है, जबकि वनरक्षक को नोटिस जारी किया गया है।
घायल तेंदुए की मौत ने खड़े किए कई सवाल
दो दिन पहले मानपुरा में घायल अवस्था में मिले तेंदुए की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद बाजना पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. दीपक बंसल, डॉ. बीएल पाटीदार और उनकी टीम ने मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम किया। प्रारंभिक जांच में तेंदुए की मौत की वजह अत्यधिक कमजोरी और भूख सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, मौत के पुख्ता और आधिकारिक कारणों की पुष्टि के लिए बिसरा एवं अन्य महत्वपूर्ण सैंपल क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला, बिरियाखेड़ी (रतलाम) तथा नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के अंतर्गत संचालित वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ लैब भेजे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, लैब की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही तेंदुए की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
मीडिया के सवालों पर अफसरों से नहीं मिला जवाब
घटना की सूचना मिलने के बाद 13 सितंबर 2026 को वन विभाग में हलचल मच गई थी। तेंदुए की मौत के बाद विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे। मामले में उज्जैन संभाग की मुख्य वन संरक्षक (CCF) डॉ. किरण बिसेन और DFO डॉ. अनुभा त्रिवेदी से मीडिया ने तेंदुए की मौत के कारणों को लेकर सवाल किए थे। उस समय अधिकारियों की ओर से मौत की निश्चित वजह स्पष्ट नहीं की जा सकी थी।
विभाग ने माना—रेंजर थे क्षेत्र से बाहर
वंदेमातरम् न्यूज ( vandematram News) द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के दौरान मैदानी स्तर पर तेंदुए की मौत को प्राकृतिक कारणों से होना बताया जा रहा था। अब मामला उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर सामने आया है कि मानपुरा क्षेत्र में तेंदुए की मौत की सूचना समय पर वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचने के पीछे बाजना रेंजर का उस दौरान क्षेत्र से बाहर होना एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रेंजर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए बिना क्षेत्र से बाहर चले गए थे। इस दौरान डिप्टी रेंजर और वनरक्षक उनके लौटने का इंतजार करते रहे और उन्होंने भी वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर सूचना नहीं दी। रतलाम (Ratlam) वन विभाग के अनुसार, रेंजर की अनुपस्थिति के कारण सूचना तंत्र में देरी हुई, जिसके चलते समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने बाजना रेंजर से पूरे घटनाक्रम का प्रतिवेदन मांगा है। साथ ही वनरक्षक को नोटिस जारी किया गया है। तेंदुए की मौत का वास्तविक कारण फिलहाल फॉरेंसिक जांच की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।
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