


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम (Ratlam) में दो बत्ती क्षेत्र की चौपाटी हटाने की नगर निगम की कार्रवाई के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। दुकानदारों के समर्थन में निगम घेराव करने पहुंचे शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब चौपाटी के कई दुकानदारों ने प्रदर्शन में कांग्रेस का झंडा शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई और उनके साथ ज्ञापन देने से दूरी बना ली। बाद में इन दुकानदारों ने अलग से नगर निगम पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।



कार्रवाई के बाद सामने आया विरोध
मंगलवार को नगर निगम की टीम तीन जेसीबी और भारी अमले के साथ दो बत्ती स्थित चौपाटी पहुंची। यहां करीब 50 से अधिक ठेला और दुकान संचालकों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। निगम की कार्रवाई शुरू होते ही मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और दुकानदारों ने इसका विरोध किया। इसी दौरान कांग्रेस नेत्री यास्मीन शेरानी और मयंक जाट भी दुकानदारों के समर्थन में पहुंचे। दोनों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे रुकवाने का प्रयास किया।



बुधवार को कांग्रेस ने किया निगम का घेराव
कार्रवाई के अगले दिन बुधवार सुबह शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निगम पहुंचे और प्रदर्शन किया। दुकानदारों की समस्याओं को लेकर निगम अधिकारियों को ज्ञापन देने की तैयारी थी, लेकिन प्रदर्शन के दौरान ही दुकानदारों के बीच मतभेद सामने आ गए। प्रदर्शन में मौजूद कई दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि उनका मुद्दा किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कांग्रेस का झंडा लगाए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि वे अपनी मांगों को राजनीतिक बैनर के नीचे नहीं रखना चाहते।
झंडे के विरोध के बाद अलग हुआ एक गुट
कांग्रेस के साथ आए कुछ दुकानदारों ने ज्ञापन सौंपा, जबकि झंडे का विरोध करने वाले दुकानदारों ने अलग होकर नगर निगम को अपना ज्ञापन दिया। इस घटनाक्रम से प्रदर्शन के दौरान दुकानदारों की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए। दुकानदारों का कहना था कि चौपाटी से जुड़ा मामला रोजी-रोटी से संबंधित है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
वर्मा की सक्रियता पर फिर उठे सवाल
चौपाटी विवाद के बीच शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा की सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस की ओर से कार्रवाई के बाद प्रदर्शन किए जाने को लेकर विरोधी सवाल उठा रहे हैं कि निगम की कार्रवाई शुरू होने के समय राजनीतिक स्तर पर विरोध क्यों नहीं हुआ और कार्रवाई के बाद ही आंदोलन क्यों किया गया। इससे पहले पीएम आवास मल्टी से जुड़े मामले में भी वर्मा की सक्रियता को लेकर इसी तरह की राजनीतिक बयानबाजी सामने आई थी। आरोप लगाया गया था कि कार्रवाई के कई दिन बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया।
रतलाम महापौर ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन और ज्ञापन के दौरान चौपाटी दुकानदारों की समस्याओं को लेकर नगर निगम स्तर पर समाधान का आश्वासन भी दिया गया। हालांकि, दुकानदारों की मांगों और उनके पुनर्व्यवस्थापन को लेकर अंतिम निर्णय क्या होगा, इस पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल चौपाटी हटाने की निगम कार्रवाई के साथ दुकानदारों के बीच उभरी दो राय ने स्थानीय राजनीति को भी नया मुद्दा दे दिया है। एक ओर दुकानदार कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनका एक वर्ग राजनीतिक दलों से दूरी बनाकर अपनी मांग रखने के पक्ष में नजर आया।

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