


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले के बाजना क्षेत्र के मानपुरा गांव के जंगल में घायल अवस्था में मिले तेंदुए की मौत अब कई सवाल खड़े कर रही है। वन विभाग इसे फिलहाल एक घायल वन्यजीव का मामला बता रहा है और मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होने की बात कह रहा है। लेकिन सामने आए घटनाक्रम और कथित वीडियो ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
रविवार सुबह जंगल में बकरी चराने गए ग्रामीणों को तेंदुआ गंभीर रूप से घायल और अचेत अवस्था में मिला था। उसके शरीर पर चोटों के निशान थे। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
सामने आए वीडियो ने बढ़ाया शक
मामले में एक वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें तेंदुआ जिंदा और घायल अवस्था में दिखाई दे रहा है। वीडियो में कथित तौर पर उसके दो पैर बंधे हुए नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, घायल तेंदुए को छेड़े जाने पर वह एक ग्रामीण की ओर लपकता और दौड़ लगाता दिखाई देता है। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—घायल तेंदुए के पैर क्यों बंधे थे? उसे किसने और किन परिस्थितियों में बांधा? क्या उसके साथ किसी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना हुई?
हादसा या हत्या?
तेंदुए के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। लेकिन ये चोटें आखिर कैसे लगीं? क्या वह किसी दुर्घटना का शिकार हुआ? क्या किसी जाल में फंसा? या फिर ग्रामीणों अथवा अन्य लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई? यह मामला अब सिर्फ एक वन्यजीव की मौत नहीं, बल्कि “हादसा या हत्या?” के सवाल के बीच खड़ा है। अगर तेंदुआ इतनी गंभीर हालत में मिला था, तो वन विभाग के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि उसके घायल होने से पहले क्या हुआ था। घटनास्थल की जांच कैसे की गई? वहां मौजूद लोगों से पूछताछ हुई या नहीं? क्या वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान की जा रही है?
वन विभाग की चुप्पी पर सवाल
डीएफओ अनुभा तिवारी ने कहा है कि घायल अवस्था में मिले तेंदुए की इलाज के दौरान मौत हो गई और उसका अंतिम संस्कार बाजना क्षेत्र में कर दिया गया। मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट से चलेगा। वहीं, सामने आए वीडियो के संबंध में उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही। लेकिन सवाल यह है कि जब एक संरक्षित वन्यजीव की मौत हो जाती है और उससे जुड़े वीडियो सामने आते हैं, तब वन विभाग को जानकारी क्यों नहीं है?यह भी पूछा गया कि जिस तरह घायल तेंदुआ लोगों पर लपक रहा था, क्या उसके साथ किसी ने मारपीट की हो सकती है? लेकिन इस सवाल पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
जांच सिर्फ पीएम रिपोर्ट तक सीमित क्यों?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का चिकित्सकीय कारण सामने आ सकता है, लेकिन तेंदुए को चोटें किसने और कैसे पहुंचाईं, इसका जवाब केवल पीएम रिपोर्ट से मिलना जरूरी नहीं है। इसके लिए घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच, वीडियो की पड़ताल और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ भी जरूरी है। वन विभाग की जांच की दिशा और उसकी पारदर्शिता पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं।
सवालों के घेरे में वन विभाग
1) तेंदुआ घायल कैसे हुआ?
2) उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान कैसे आए?
3) कथित वीडियो में उसके पैर बंधे हुए क्यों दिखाई दे रहे हैं?
4) घायल तेंदुए के आसपास मौजूद लोग कौन थे?
5) क्या तेंदुए को किसी ने पीटा या प्रताड़ित किया?
6) वीडियो सामने आने के बावजूद वन विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं?
7) मौत के बाद अंतिम संस्कार में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई?
8) क्या पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होगी?
वन विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती
एक संरक्षित वन्यजीव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और मामले पर वन विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। अब जरूरत है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हो, वीडियो की जांच हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाया जाए। तभी पता चल सकेगा कि जंगल में घायल मिला तेंदुआ किसी हादसे का शिकार था या उसके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है।
Website Design By
KAMAKSHI WEB
CONTACT : +91-9753910111


