


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले के समीपस्थ ग्राम बंजली की शासकीय चरनोई भूमि पर हजरत मस्तान शाह बाबा की अवैध दरगाह के नाम से किए अतिक्रमण के मामले में कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। दशम व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड), रतलाम अरुण सिंह ठाकुर ने मुतवल्ली फिरोज मस्तान बाबा की ओर से प्रस्तुत अस्थायी निषेधाज्ञा के आवेदन को निरस्त कर दिया। यह आवेदन तहसीलदार रतलाम शहर के बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए दायर किया गया था।
न्यायालय ने 16 सितंबर 2026 को पारित आठ पृष्ठीय आदेश में कहा कि वादी की ओर से ऐसा कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे संबंधित शासकीय चरनोई भूमि के आवंटन अथवा उस पर स्थायी निर्माण की अनुमति का प्रमाण मिले। न्यायालय ने यह भी माना कि उर्स जैसे आयोजन के लिए प्रशासन से मिली सीमित अवधि की अनुमति को भूमि पर स्वामित्व या स्थायी निर्माण के अधिकार के रूप में नहीं माना जा सकता।मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सुरेश वर्मा ने पैरवी की। वहीं शिकायतकर्ता नरेन्द्र शर्मा की ओर से अधिवक्ता विवेक उपाध्याय, वीरेंद्र कुलकर्णी और दीपक रजक ने पक्ष रखा।
बेदखली के खिलाफ कोर्ट पहुंचे थे मुतवल्ली
रतलाम शहर तहसीलदार द्वारा 26 जून 2026 को पारित बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए मुतवल्ली फिरोज मस्तान बाबा ने सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था। वादी ने तहसीलदार की नोटिस और कार्रवाई को शून्य घोषित करने के साथ ही आदेश 39 नियम 1 एवं 2 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राजस्व रिकॉर्ड, उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण किया। आदेश में उल्लेख किया गया कि वादी भूमि के शासन द्वारा किसी व्यक्ति, ट्रस्ट या कमेटी को आवंटित किए जाने अथवा वहां निर्माण की अनुमति दिए जाने से संबंधित दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
उर्स की अनुमति को स्थायी निर्माण का अधिकार नहीं
मामले में सामने आए तर्कों पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी धार्मिक आयोजन के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित अवधि के लिए दी गई अनुमति अपने आप में भूमि पर स्थायी अधिकार या निर्माण का वैधानिक आधार नहीं बनती। न्यायालय के आदेश के अनुसार, संबंधित भूमि के संबंध में वादी की ओर से ऐसा प्रथमदृष्टया दस्तावेजी आधार सामने नहीं आया, जिसके आधार पर अंतरिम संरक्षण दिया जा सके।
नोटिस और सुनवाई का अवसर देने की बात भी आदेश में दर्ज
तहसीलदार की कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताए जाने की दलील पर भी न्यायालय ने विचार किया। आदेश में कहा गया कि संबंधित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और अपना पक्ष रखने के लिए अवसर भी दिया गया था। इस आधार पर न्यायालय ने प्रथमदृष्टया यह नहीं माना कि तहसीलदार की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होने के कारण अवैध हो जाती है।
राजस्व आदेश के खिलाफ अपील का प्रावधान बताया
न्यायालय ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों का भी उल्लेख किया। आदेश में कहा गया कि धारा 248 के तहत पारित आदेश के विरुद्ध धारा 257 के अंतर्गत अपील अथवा रिवीजन का वैधानिक प्रावधान राजस्व न्यायालयों के समक्ष उपलब्ध है। ऐसे में तहसीलदार की राजस्व कार्रवाई को चुनौती देते हुए सिविल कोर्ट से अंतरिम राहत पाने के लिए वादी प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार स्थापित नहीं कर सका। इसी निष्कर्ष के आधार पर अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन खारिज कर दिया गया।
तहसीलदार ने 26 जून को बेदखली और अर्थदंड का आदेश दिया था
मामला ग्राम बंजली स्थित सर्वे क्रमांक 44 की शासकीय चरनोई भूमि से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार इस भूमि का कुल रकबा 0.200 हेक्टेयर है। शिकायत में करीब 0.03 हेक्टेयर भूमि पर दरगाह के नाम से कब्जा कर निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के आधार पर तहसीलदार रतलाम शहर के समक्ष राजस्व प्रकरण क्रमांक 01/अ-68/2026-27 दर्ज किया गया। प्रकरण में स्थल निरीक्षण, पटवारी रिपोर्ट और पंचनामा सहित अन्य रिकॉर्ड तैयार कराए गए। सुनवाई के बाद 26 जून 2026 को तहसीलदार न्यायालय ने भूमि को शासकीय चरनोई दर्ज पाते हुए कब्जे को अतिक्रमण माना और मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत बेदखली का आदेश पारित किया। आदेश में ₹3,000 का अर्थदंड भी लगाया गया था।
स्टे खारिज होने के बाद प्रशासन से कार्रवाई की मांग
सिविल कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद शिकायतकर्ता नरेन्द्र शर्मा (बंटी बजरंगी) ने कलेक्टर रतलाम, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और तहसीलदार रतलाम शहर को आवेदन देकर आगे की कार्रवाई की मांग की है। आवेदन के साथ न्यायालय के आदेश की प्रति भी संलग्न की गई है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से शासकीय चरनोई भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण और निर्माण को नियमानुसार हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
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