रतलाम, वन्देमातरम् न्यूज।
शहर के महू रोड़ बस स्टैंड पर भक्तन की बावड़ी स्थित मुक्तिधाम अपने आप मे एक अनूठा स्थान है। आमतौर पर शमशान में मृत आत्मा को क्रियाकर्म के द्वारा शांति दी जाती है। मगर यहां मृत आत्मा के साथ जीवित आत्मा को भी शांति मिलती है।
कारण यहां पर विराजी मां कालका है। मां कालिका की आलौकिक श्रृंगारित प्रतिमा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। जो अपने शरण मे आये हर भक्त की मनोकामनाएं पूरी करती है। मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है की यहां पर तंत्र साधना व कार्यसिद्धि के विशेष अनुष्ठानों से भक्तों के साथ ही विश्व कल्याण के कार्य भी सहज सम्पन्न होते है।
चैत्र नवरात्री में पिछले 28 सालों से भक्तन की बावड़ी स्थित मुक्तिधाम की धर्मार्थ सेवा समिति प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी मुक्तिधाम धर्मार्थ सेवा समिति दशहरे यानी सोमवार को शाम 7 बजे से रात्रि कालीन विशाल भंडारे का आयोजन करेगी। इसके साथ ही भजन संध्या का आयोजन भी होगा। कार्यक्रम श्मशान में मां कालिका के दरबार मे ही सम्पन्न होंगे। गौरतलब है की पिछले दो सालों से कोरोना महामारी के कारण मंदिर प्रांगण में कार्यक्रम नहीं हो पाए थे। मुक्तिधाम धर्मार्थ सेवा समिति ने समस्त धर्म प्रेमी जनता से सपरिवार प्रसादी ग्रहण करने का आग्रह किया। इस भण्डारे का आयोजन समिति के माध्यम से व जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती है उनके सहयोग से पूरा होता है। मंदिर में आये भक्त बताते हैं कि भण्डारे की व्यवस्था में सामग्री आदि की व्यवस्था स्वयं हो जाती है, किसी को सहयोग के लिए विशेष रूप से बोलने की आवश्यकता नहीं होती।
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