
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिला मुख्यालय स्थित वार्ड क्रमांक 8 में प्रोफेसर कॉलोनी और कोमल नगर के बीच लंबे समय से चल रहे बहुचर्चित भूमि एवं रास्ता विवाद में इंदौर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सैलाना रोड स्थित विवादित भूमि पर नियमों के विपरीत निजी बगीचा, बाउंड्रीवॉल निर्माण और सार्वजनिक रास्ता बंद किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह (Ratlam Collector Misha Singh) को अंतिम चेतावनी दी है।

न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूर्व में पारित आदेश का तीन सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। यदि तय समयसीमा में आदेश का पालन नहीं हुआ और याचिकाकर्ता को दोबारा कोर्ट आना पड़ा, तो इसके लिए कलेक्टर (Ratlam Collector Misha Singh) स्वयं जिम्मेदार होंगी तथा उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
याचिकाकर्ता ने लगाया आदेश की अनदेखी का आरोप
याचिकाकर्ता स्नेहलता सिंह की ओर से अधिवक्ता आदित्य वर्मा ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि पूर्व में पारित आदेश के बावजूद रतलाम कलेक्टर (Ratlam Collector Misha Singh) ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया। अधिवक्ता वर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट ने पहले याचिकाकर्ता के आवेदन पर कलेक्टर को 30 दिन के भीतर न्यायिक निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी को परिणाम भुगतने होंगे।
2025 के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि सैलाना रोड स्थित एक होटल के सामने निजी निर्माणाधीन बगीचे के मामले में हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2025 को स्पष्ट आदेश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि होटल के उत्तर दिशा में स्थित पूर्व-पश्चिम दिशा का सार्वजनिक रास्ता, जिसका वर्षों से स्थानीय नागरिक और व्यापारी उपयोग करते आ रहे हैं, उसे तत्काल अतिक्रमण मुक्त कर 5 जुलाई 2024 की स्थिति में बहाल किया जाए। इसके बावजूद जिला प्रशासन और नगर निगम ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद याचिकाकर्ता को पुनः हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
30 जनवरी 2026 को भी दिए गए थे निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने 30 जनवरी 2026 को रतलाम कलेक्टर (Ratlam Collector Misha Singh) को आदेश जारी कर 30 दिन के भीतर निर्णय लेने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि कुछ पार्षदों के निजी स्वार्थ के चलते पूरा मामला लंबित रखा जा रहा है। समयसीमा समाप्त होने के बाद याचिकाकर्ता ने दोबारा आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर अब हाईकोर्ट ने सख्त चेतावनी जारी की है।
खोला था रास्ता, अगले दिन हुआ फिर निर्माण
अदालत के आदेश के बावजूद प्रशासनिक निष्क्रियता से परेशान स्थानीय कुछ लोगों ने 11 जनवरी 2026 की रात स्वयं रास्ता खोल दिया था। इसके अगले ही दिन 12 जनवरी 2026 की सुबह कुछ स्थानीय पार्षदों और भाजपा से जुड़े नेताओं द्वारा विरोध स्वरूप नया चबूतरा निर्माण शुरू किया था। हाईकोर्ट ने इस घटनाक्रम को भी गंभीरता से लिया है।
वीडियो और फोटो साक्ष्य कोर्ट में पेश
शिकायतकर्ता की ओर से सार्वजनिक रास्ते पर निजी बगीचा बनाकर ताला लगाने के मामले में अलग से याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता आदित्य वर्मा ने पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण, वीडियो, फोटो साक्ष्य तथा पूर्व आदेशों की अवहेलना से जुड़े तथ्य कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में प्रस्तावित है।
Website Design By
KAMAKSHI WEB
CONTACT : +91-9753910111


