
असीम राज पांडेय, रतलाम। फूलछाप पार्टी इन दिनों दिल्ली से लेकर रतलाम तक नारी शक्ति वंदन अभियान का डंका पीट रही है। झंडे, बैनर, भाषण और मंचों पर महिलाओं के सम्मान की ऐसी बरसात हो रही है मानों अब महिलाओं की हर समस्या का समाधान पलभर में हो जाएगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी सुना रही है। शहर के पटरी पार कुछ वार्ड माननीयों ने एक महिला को परेशान करने का ऐसा मोर्चा संभाल रखा है कि नारी शक्ति वंदन अभियान भी लजवा जाए। मजे की बात यह कि जिले की कमान संभाल रहीं महिला प्रमुख भी इस मामले में आंखें मूंदे बैठी हैं। मामला नियम विरुद्ध निजी बगीचा और धार्मिक ओटला बनाकर रास्ता बंद करने का है। न्याय के बड़े मंदिर से महिला की याचिका पर सुनवाई के बाद जिला प्रशासन को दूसरी बार चेतावनी दी जा चुकी है कि समय रहते न्याय दीजिए, वरना जिम्मेदारी तय होगी। मगर यहां आदेश फाइलों में घूम रहे हैं और पीड़िता चक्कर काट रही है। ये अंदर की बात है… (This is an inside story!..) कि फूलछाप पार्टी में नारी शक्ति वंदन मंच तक सीमित है, जबकि मैदान में कुछ वार्ड माननीयों के कारनामें सुर्खियां बंटोर रहे हैं। झंडे की आड़ में दबंगई और भाषणों की ओट में षडयंत्र स्वरूप साधना। लगता है कि यही पार्टी का अब नया संगठनात्मक मॉडल बन चुका है। जनता भी अब समझ रही है कि कथनी के मंच पर सम्मान है, करनी के मैदान में महिला विरोधी षडयंत्र की कहानी।

खाकी की ईमानदारी पर भारी होटल मालिकों के बिल
रतलाम जिले के कई होटल इन दिनों होटल कम, हर तरह की अनैतिक सुविधा केंद्र ज्यादा नजर आने लगे हैं। कानून दरवाजे पर जूते उतारकर बाहर खड़ा रहता है और भीतर अनैतिक गतिविधियां एसी रूम में मजे से चलती रहती हैं। हाल ही में शहर के एक थाने से महज 500 मीटर दूर स्थित होटल में बेटी को नशा पिलाकर दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का घिनौना मामला सामने आया। इससे पहले नामली के पास फोरलेन स्थित होटल और शहर के बीचों-बीच थाने की कॉलोनी से सटे होटल भी ऐसे मामलों में बदनाम हो चुके हैं। होटल संचालकों का गणित बड़ा सीधा है। कुछ नोट लो, कुछ घंटे का कमरा दो और बाकी समाज भुगते। इधर जिले के कप्तान समय-समय पर होटल चेकिंग, रिकॉर्ड जांच और सख्ती के निर्देश देते रहते हैं, उधर कुछ खाकीधारी शायद निर्देशों को साहित्य मानकर पढ़ते भर हैं।ये अंदर की बात है… (This is an inside story!..) कि जिन होटलों में ऐसे कांड हुए, वे कई खाकी कर्मियों के आरामगाह और मदहोशी केंद्र भी बताए जाते हैं। ऐसे में जांच कैसे होगी, जब मेहमाननवाजी का बिल ईमानदारी पर भारी पड़ जाए? जनता पूछ रही है, जब चौकीदार ही बदनाम होटल मालिकों की सेवा में व्यस्त हो, तो सुरक्षा कौन करेगा?
महापंचायत अलर्ट में अफसरों की कॉटेज पार्टी
मेगा इंडस्ट्रियल पार्क के विरोध में प्रस्तावित महापंचायत ने जिला और पुलिस प्रशासन की नींद पहले ही उड़ा दी थी। महापंचायत के दिन चप्पे-चप्पे पर खाकी, अतिरिक्त बल और राजस्व अमले की तैनाती कर दी गई। माहौल ऐसा बनाया गया मानो कोई युद्ध होने वाला हो। लेकिन जैसे ही महापंचायत में कुछ आसपास के लोग पहुंचे, जिलेभर से बुलाकर मैदानी ड्यूटी में लगाए गए कुछ राजस्व अधिकारी सागौद रोड स्थित नियम विरुद्ध बनी कॉलोनी के आलीशान कॉटेज में पहुंच गए। वहां वाहनों का काफिला खड़ा था और अंदर व्यवस्था ऐसी कि सरकारी ड्यूटी कम, निजी पार्टी ज्यादा लग रही थी। सवाल यह है कि जिन कॉटेजों पर नियम विरुद्ध निर्माण, सरकारी जमीन कब्जाने और रसूखदारों की मौज-मस्ती के आरोप हैं, वहीं अधिकारी सम्मान ग्रहण करने क्यों पहुंचे? ये अंदर की बात है… (This is an inside story!..) कि जमीन नापने वाले विभाग का कुछ हिस्सा भूमाफियाओं पर ऐसा मेहरबान है कि जरूरत पड़ने पर नाप-जोख से ज्यादा नाते-रिश्ते निभाए जाते हैं। दस्तावेजों में हरियाली उगती है, नक्शों में सपने सजते हैं और सरकारी जमीन पर स्वर्ग बसते हैं। जनता समझ रही है, जहां अफसर कॉटेज में पार्टी करें, वहां कार्रवाई सिर्फ दस्तावेज में सिमट कर रह जाती है।
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