मामला कॉन्वेंट स्कूल का : आत्महत्या नहीं हत्या मानकर की जाए जांच, हिन्दू युवाओं की मांग

मामला कॉन्वेंट स्कूल का : आत्महत्या नहीं हत्या मानकर की जाए जांच, हिन्दू युवाओं की मांग

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा और ट्रेनी नन की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। रविवार को समस्त हिंदू युवा द्वारा छात्रा के साथ हुई ज्यादती और प्रताड़ना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। बड़ी संख्या में युवा कोर्ट तिराहे से रैली निकाल कर पुराने एसपी कार्यालय पहुंचे। यहां पर पुलिस महानिरीक्षक उज्जैन रेंज के नाम ज्ञापन सीएसपी हेमन्त चौहान को सौंप कर उच्च स्तरीय जांच न्यायाधीश स्तर पर कराने की मांग की है।
सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि कॉन्वेंट स्कूल में पूर्व ऐसी घटनाएं हुई जिससे स्कूल प्रशासक शक के घेरे में रहा है और ऐसी कई गतिविधियां संचालित की जाती है जिससे यह प्रतित होता है कि धर्मांतरण और मंतातरण जैसी गतिविधियां प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से होती है जो कि मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के अंतर्गत श्रेणी में आता है। छात्रा की आत्महत्या नहीं मानते हुए हत्या मानकर जांच करना चाहिए। ज्ञापन में 6 बिंदुओं का उल्लेख कर उसी आधार पर जांच की मांग की है। जिनमें प्रमुख रूप से सवाल किया है कि कॉन्वेंट स्कूल में नन बनने की ट्रेनिंग दी जाती है ? अगर दी जाती है तो क्या स्कूल में पढ़ने वाले हिंदू बच्चों को ईसाई समाज की शिक्षा दी जाती है ? स्कूल प्रबंधन द्वारा नन बनने के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताणना दी जाती उस बात की भी जांच होना आवश्यक है। इस दौरान युवाओं ने जमकर नारेबाजी भी की।
यह है मामला
सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल परिसर में 9 दिसंबर की रात 17 वर्षीय छात्रा अलीशान पिता लेब्रियल लोम्गा ने फांसी लगाकर खुदकुशी की थी। स्टेशन रोड पुलिस ने परिजन के आने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कहकर घटना के दो दिन बाद भी खुदकुशी के कारण का पता नहीं लगा सकी। शनिवार सुबह करीब 11 बजे मृतिका अलीशान के पिता लेब्रियल, मां बप्तिस्ता और भाई अखिलेश लोम्गा कार से जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन स्कूल प्रबंधन के कर्मचारियों के कारण वह मीडिया से बात नहीं कर पाए। वहीं तीन डॉक्टरों की पैनल से पोस्टमार्टम हुआ था, जिसकी शार्ट पीएम रिपोर्ट नहीं आना भी कई सवाल खड़े करता है।

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