नाबालिक का अपहरण कर दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास, किराए के कमरे में बनाकर रखा बंधक

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
5 वर्ष 11 माह पुराने एक मामले में न्यायालय ने नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने पर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बुधवार को इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद पीड़िता के परिजन ने न्याय की जीत पर व्याकुल हो गए।
विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश योगेन्द्र कुमार त्यागी ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रकरण में पैरवीकर्ता विशेष लोक अभियोजक गौतम परमार ने बताया अभियुक्त
बालु उर्फ बालिया पिता गिरधारीलाल (उम्र 35 वर्ष ) निवासी डॉगडी थाना मनासा जिला नीमच को अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(5) एक्ट में आजीवन कारावास एवं अर्थदंड, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्ष्ण अधिनियम, 2012 की धारा 6 में 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं अर्थदंड, धारा 366 भादवि में 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं अर्थदंड, धारा 344 भादवि में 1 वर्ष का कठोर कारावास अर्थदंडित किया गया।

क्या है पूरा मामला
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी शिव मनावरे ने बताया 25 दिसम्बर 2015 को थाना रावटी पर 17 वर्षीय पीड़िता माँ के साथ पहुंची थी। पीड़िता ने बताया उसने अभियुक्त बालू गायरी के यहाँ ट्रेक्टर में रेती भरने की मजदूरी की थी। मजदूरी के 2 हजार रुपए अभियुक्त बालू गायरी से लेना बाकी थे। मजदूरी करके वह और अन्य मजदूर सब चले गए थे। अभियुक्त बालू गायरी का पीड़िता के पास फोन आया और कहा कि तुम्हारे जो मजदूरी के रुपए बाकी हैं, रावटी बस स्टेण्ड पर आकर ले जाओ। पीड़िता मजदूरी के पैसे लेने रावटी बस स्टेण्ड गयी, जहाँ बालू मिला और उससे बोला कि मनासा चल वहाँ पर रुपए दूंगा और बहला फुसलाकर बस में बिठाकर मनासा ले गया। मनासा में उसे एक किराए के कमरे में रखा और शादी करने का बोल कर दुष्कर्म किया। करीब तीन महीने तक किराए के कमरे में उसे रखा व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करता रहा। जब भी बालू घर से बाहर जाता था तो उसे घर के अंदर बंद कर बाहर से ताला लगा जाता था। परिजन ने बंधक रखी बालिका को अभियुक्त के चुंगल से छुड़वाने के बाद थाने पर एफआईआर दर्ज करवाई थी।


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