शहादत को सलाम : वीर सपूत का पार्थिव देह पहुंचा गांव, जगह-जगह पुष्पों की बारिश, सीएम ने दी श्रंद्धाजलि

शहादत को सलाम : वीर सपूत का पार्थिव देह पहुंचा गांव, जगह-जगह पुष्पों की बारिश, सीएम ने दी श्रंद्धाजलि

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
रतलाम जिले के वीर सपूत का पार्थिव देह शुक्रवार सुबह सड़क मार्ग से जिले के मावता गांव पहुँचा। मणिपुर के इम्फाल में शहीद 22 वर्षीय लोकेश कुमावत की शहादत को सलाम करने के लिए इंदौर से सड़क मार्ग से गांव लाए पार्थिवदेह के दौरान जगह-जगह बड़ी संख्या में लोगों ने नम आँखों से पुष्प अर्पित किए। महज 22 वर्ष की उम्र में रतलाम के लाल लोकेश कुमावत ने देश के लिए शहादत दी है। भारतीय सेना में जवान क पद पर कार्यरत लोकेश मणिपुर के इंफाल में पदस्थ थे। लोकेश के परिजनों को लोकेश की यूनिट के मेजर ने उनके शहीद होने की सूचना दी। गांव के लाल लोकेश कुमावत की शहादत की सूचना मिलने के बाद मावता गांव में माहौल गमगीन है। हालांकि लोकेश के शहीद होने के बारे में विस्तृत जानकारी परिजनो को भी नहीं है। ग्रामीणों द्वारा नक्सलियों से मुठभेड़ में लोकेश के शहीद होने की जानकारी बताई जा रही है। मावता शव पहुँचने के बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी जाएगी।
मावता के सपूत लोकेश कुमावत की शहादत की सूचना
परिजनों को गुरुवार को मिली थी। इसके बाद शहीद के
परिजन इंदौर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए थे।


2019 में सिलेक्ट हुए थे वीर सपूत लोकेश
ग्रामीणों ने बताया कि मार्च 2019 में लोकेश का चयन भारतीय सेना के लिए हुआ था। जहां हैदराबाद में ट्रेनिंग के बाद लोकेश को मणिपुर में पोस्टिंग मिली थी। ग्रामीणों के अनुसार महीने भर पहले ही लोकेश अपने गांव छुट्टी पर आया था, जिसके बाद परिवार वालों से विदा लेकर लोकेश पुनः अपनी ड्यूटी पर लौट गए थे।
लेकिन इस बार गांव का यह सपूत तिरंगे में लिपट कर वापस लौट रहा है। लोकेश के परिवार में उसके पिता और माता रेखा बाई सहित छोटा भाई विशाल है। लोकेश के पिता और भाई कृषि का कार्य करते हैं।

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