शिवकृपा आती है, तो प्राप्त होता है जीवन का कोई न कोई सुख, पं. प्रदीप मिश्रा रतलाम के शिव मन्दिर पर चढ़ाएंगे जल

शिवकृपा आती है, तो प्राप्त होता है जीवन का कोई न कोई सुख, पं. प्रदीप मिश्रा रतलाम के शिव मन्दिर पर चढ़ाएंगे जल

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
पं. श्री प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से वैशाखी श्री शिव महापुराण कथा की शुरुआत आयोजन के स्वागताध्यक्ष एवं विधायक चेतन्य काश्यप के मुख्य आतिथ्य में शनिवार से हुई। पहले ही दिन शिवमहापुराण कथा सुनने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। व्यासपीठ पर पं. श्री प्रदीप मिश्रा ने सबसे पहले भगवान महाकाल की पूजा अर्चना की। मुख्य आयोजक कल्याणी रविन्द्र पाटीदार सिर पर श्री शिव महापुराण कथा की पोथी रखकर आए और व्यास पीठ पर रखकर पूजा-अर्चना कर कथा का शुभारंभ किया।

कथा सुनने पहले दिन उमड़ा भक्तों का सैलाब।

कथा के आरंभ में स्वागताध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि शहर विधायक चेतन्य काश्यप ने कहा कि पंडित श्री प्रदीप मिश्रा ने पिछले कई वर्षों से शिव की भक्ति, शिव की शक्ति और शिव के द्वारा भारत का मस्तक कैसे उच्च स्तर पर स्थापित हो, इस दिशा में कार्य कर देश का नाम विश्व में ऊंचा किया है। पंडित श्री मिश्रा ने शिव की पूजा कैसे हो उसका बोध कराया है। आज शिव कण-कण में है। शिव में ही सृष्टि है। आपने सीहोर से देश-विदेश में मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है। श्री काश्यप ने मुख्य आयोजनकर्ता कल्याणी पाटीदार को रतलाम की बेटी बताते हुए उन्हें व रतलाम की जनता को कथा आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी। इस दौरान मुख्य आयोजनकर्ता कल्याणी रविन्द्र पाटीदार, आयोजन समिति के कन्हैयालाल मौर्य, सतीश राठौर, अनिल झालानी, मुन्नालाल शर्मा, प्रदीप उपाध्याय, अशोक पोरवाल, निमिष व्यास, मनोहर पोरवाल, राजकुमार गुर्जर, शांतिलाल गोयल, प्रकाश कुमावत, सुभाष कुमावत, नारायण पाटीदार, शिवनारायण पाटीदार, जगदीश पहलवान, राजेश चौहान, मोहन मुरलीवाला आदि हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे।
हर हर महादेव से हुई शुरुआत


शिवमहापुराण कथा की शुरुआत पंडित श्री मिश्रा ने हर हर महादेव, घर घर महादेव, जन जन महादेव के उद्घोष से की। पंडित श्री मिश्रा ने पहले ही दिन भक्तों के सैलाब को देख कहा शिवकृपा आती है तब हमें जीवन का कोई न कोई सुख प्राप्त होता है। शिव की कृपा उदारता आप और हम पर हुई है। वैशाखी माह में वैष्णवी शिवमहापुराण सुनने बैठे हैं। रतलामवासियों को काफी इंतजार था आज ऐसी खुशी है कि सबके घर में दीपावली आ गई। पहले ही दिन तीन टेंट भी छोटे पड़ गए है। आपने कहा कि सत्संग की कमाई कभी व्यर्थ नहीं जाएगी। सत्संग की पूंजी कभी समाप्त नहीं होगी। अपने जीवन को आनंद से जियो न कि किसी की बुराई करके। कोई कितनी भी गालियां दे मुंह पर कपड़ा रख चुपचाप निकल जाए गालियां देने वाले को कर्म फल मिलेगा। पंडित श्री मिश्रा के ऐ मेरे भोले नाथ, दिल तुझको दिया के भजन पर पूरा पांडाल झूम उठा।
शिव मंदिर जाओ बुरी संगत खत्म हो जाएगी
पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि कथा में आओ तो अपनी राजसत्ता, धन, वैभव, ऐश्वर्य एवं विलासिता छोड़कर आए और चित्त लगाकर शिव पुराण श्रवण करें तो निश्चित रूप से उन्हें भगवान शिव विशेष प्रसन्न होंगे। यदि कोई भी व्यक्ति बुरी संगत शराब, वेश्यावृत्ति या नशाखोरी के गलत मार्ग की ओर अग्रसर हो और आपको उसकी बुरी संगति की थोड़ी भी भनक लग जाए तो उसे शिव मंदिर ले जाओ और उसे भगवान शिव पर एक लोटा जल चलाने की प्रेरणा दें। निश्चित रूप से एक माह के भीतर बुरी संगत में पड़ा व्यक्ति सही पथ पर अग्रसर होकर सदकार्यों में जुट जाएगा।
पंडित मिश्रा रतलाम में शिव मंदिर पर चढ़ाएंगे जल
पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि आगामी 29 अप्रैल को वैशाखी शिवरात्रि आ रही है रतलामवासी उस दिन किसी भी एक शिव मंदिर पर जाकर जल चढ़ाएं। यह आपके और आपके परिवार की सुख- समृद्धि, धन वैभव एवं मनोकामना पूर्ण करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं उस दिन रतलाम के एक शिवमंदिर में जाकर जल चढ़ाएंगे। कथा की समाप्ति पर ईशर ओर गोरा जी का रूप धारण करे कलाकार भी मंच पर आए जिनकी पूजा अर्चना के बाद आरती के साथ प्रथम दिन की कथा का समापन हुआ।
आज कथा में यह स्मरण कराएंगे
शिवमहापुराण के दूसरे दिन रविवार को पंडित श्री मिश्रा जिसकी नेत्र ज्योति व श्रवण शक्ति कम है, उनके लिए कथा में स्मरण कराकर उपाय बताएंगे। कथा के पहले ही दिन उन्हें काफी पत्र भी मिले। कथा के दौरान पंडित मिश्रा द्वारा बताए गए उपायों से लाभ भी भक्तों ने बताए।
चौबीसा ब्राह्मण व दामोदर दर्जी समाज की सराहना की
पंडित श्री मिश्रा ने कथा के दौरान चौबीसा ब्राह्मण समाज और दामोदर दर्जी समाज द्वारा बाहर से कथा सुनने आने वाले भक्तों के लिए समाज की धर्मशाला ओर भोजन की व्यवस्था करने पर सराहना की।
108 जोड़ों द्वारा रूद्राभिषेक
श्री शिव महापुराण कथा से पूर्व आयोजन स्थल पर शनिवार सुबह रूद्राभिषेक का विशाल आयोजन भी शुरू हुआ। इसमें 108 जोड़ों ने भाग लेकर भगवान शिव का अभिषेक किया। कथा के दौरान प्रतिदिन 108 जोड़ों द्वारा रूद्राभिषेक किया जाएगा।

यह भी प्रमुख रूप से कहा

  • किसी न किसी रूप में समर्पण का भाव होना चाहिए।
  • शिव को सिर्फ आपका निर्मल मन चाहिए। वैभव, संपत्ति उसको कोई मतलब नहीं।
  • शिवजी के पास एक लोटा जल लेकर जा रहे हो तो दिल भी साथ लेकर जाओ।
  • वैशाख माह में किसी को एक गिलास पानी पिलाने का मौका मिले तो समझना गंगा में 1000 डूबकी लगाने का पुण्य रोज कमा रहे हो आप।
  • दुख आएगा अटक जाओंगे, सुख आएगा भटक जाओंगे।

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