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Wednesday, April 17, 2024

लापरवाही या गैरजिम्मेदारी : सवालों पर जिम्मेदारों के गोलमाल जवाब, जावरा और रतलाम से नामली पहुंच रही डायल -100

टीआई प्रीति कटारे – 2 महीने से गाड़ी नहीं, सुपरवाइजर सचिन – केवल 10 दिन से खराब है, प्रभारी वाहिद खान – 1 जून से ऑफ रोड ! अब कौन सही कौन गलत ?

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
मध्यप्रदेश में पुलिसिंग को मजबूत करने के लिये डायल – 100 या फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (FRV) की शुरुआत की गई। मगर निजी कंपनी और पुलिस विभाग के बीच तालमेल ना बैठ पाने से डायल – 100 केवल नाम की रह गई है। ऐसा ही मामला रतलाम जिले के नामली थाने से सामने आया है। जहां डायल -100 तो है मगर थाने से उसे कोई पुलिस जवान मुहैय्या नहीं है। ऐसे में डायल – 100 केवल शोपीस बनकर थाने पर खड़ी है। वंदेमातरम् न्यूज टीम ने जब पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों से चर्चा की तो सभी का जवाब और बर्ताव गैर जिम्मेदाराना मिला।

दरअसल नामली थाने पर पिछले 2 माह से डायल – 100 केवल कागज़ो पर चल रही है। फोरलेन पर या आसपास क्षेत्र में कोई भी घटना या दुर्घटना होने पर गाड़ी ऑफ रोड़ बता दी जाती है। जिसके बाद डायल – 100 रतलाम या फिर जावरा से भेजी जाती है। जिसे पहुंचने में लगभग 20 से 40 मिनट समय लग जाता है। जबकि डायल – 100 को 5 से 10 मिनट में पहुंचना होता है। ऐसे में आम नागरिक को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नामली क्षेत्र फोरलेन से लगा हुआ है जहां आये दिन दुर्घटनाओं व वारदात की खबरें मिलती रहती है। ऐसे में डायल – 100 का नो रिस्पांस बड़ी ही गंभीर लापरवाही है।

गाड़ी कब से बंद, कौन सही कौन गलत ?
डायल – 100 में थाने से जवान मुहैय्या नहीं करवाने का सवाल जब नामली थाना प्रभारी प्रीति कटारे से किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि आपको जानकारी गलत है। थाने पर 2 माह से डायल-100 ऑफ रोड है। तो जवान मुहैय्या करवाने का सवाल ही नहीं बनता। जब वंदेमातरम् की टीम ने डायल-100 संचालित कर रही निजी कंपनी के सुपरवाइजर सचिन नागरिया से सवाल पूछा तो उसका कहना था गाड़ी खराब होने के कारण केवल 10 दिन से ऑफ रोड है। वहीं डायल-100 के प्रभारी मो. वाहिद खान से जब सवाल किया गया तो जवाब और भी चौंकाने वाला मिला, खान का कहना है कि पिछले 1 जून से नामली की FRV ऑफ रोड है यानी 25 दिनों से।

एक गाड़ी खराब तो दूसरा विकल्प नहीं
किसी थाने की डायल – 100 अगर खराब हो जाती है, तो उसकी जगह दूसरी गाड़ी मुहैय्या कराने का कोई विकल्प रतलाम जिले में नहीं है। ऐसे में निजी कंपनी की मनमानी भी साफ देखी जा सकती है। जिसके सामने पुलिस विभाग खुद बेबस है। नामली में डायल – 100 का चालू नहीं होना और जिम्मेदारों के गोलमाल जवाबों ने कई सवाल खड़े कर दिए है। थाने पर अगर डायल – 100 है तो जवान क्यों नहीं दिया जा रहा ? अगर थाने पर 2 माह से डायल – 100 नहीं है तो फिर कंपनी पर कोई एक्शन क्यों नहीं ? कंट्रोल रूम, सुपरवाइजर और टीआई के जवाबों में इतना बड़ा अंतर क्यों ? मामला केवल 1 थाने का सामने आया है जिले में कुल 20 से अधिक थाने और 1 दर्जन से अधिक चौकियां और भी है। ऐसे में यहां डायल – 100 की स्थिति किस भरोसे होगी?

टेक्निकल खराबी के कारणों से नामली FRV बंद है जो जल्द ही चालू हो जाएगी। भोपाल कंट्रोल को सूचित कर दिया गया है। जिले में अन्य थानों पर भी जांच कर डायल – 100 की सुविधा को सुचारू किया जाएगा। – राकेश खाखा, एएसपी रतलाम

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