
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिला मुख्यालय के महू-नीमच हाईवे पर स्थित बंद पड़ी स्ट्रॉ बोर्ड फैक्टरी (Straw Board Factory) और पलसोड़ी क्षेत्र में घास उत्पादन के लिए उपयोग में लाई जा रही हजारों बीघा बेशकीमती जमीन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। यह जमीन सरकारी घोषित होने के बावजूद प्रशासन को अब इसे लेकर राजस्व मंडल ग्वालियर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

बता दें कि करीब डेढ़ दशक पहले तत्कालीन कलेक्टर संजय गोयल ने इस मामले में बड़ा फैसला देते हुए नजूल तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर दिया था। 2 जुलाई 2014 को जारी आदेश में उन्होंने स्ट्रॉ बोर्ड फैक्टरी (Straw Board Factory) और पलसोड़ी की जमीन का लीज पट्टा भी समाप्त कर दिया था तथा फैक्टरी और कच्चे उत्पादन के लिए उपयोग में लाई जा रही जमीन को सरकारी घोषित कर दिया था।
इसके बाद भी जमीन पर विवाद खत्म नहीं हुआ। बताया जाता है कि स्ट्रॉ बोर्ड फैक्टरी (Straw Board Factory) कई साल पहले बंद हो चुकी थी, लेकिन उसका बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सक्रिय रहा। वर्ष 2003-04 में नजूल तहसीलदार के समक्ष जमीन के नामांतरण को लेकर अपील की गई थी। उस समय दीवानी वाद क्रमांक 88/92 में 13 दिसंबर 1995 को पारित डिक्री के आधार पर तत्कालीन नजूल तहसीलदार ने फैक्टरी के डायरेक्टर अब्बास भाई की मृत्यु के बाद उनके वारिस के रूप में अनवर हुसैन के नाम नामांतरण कर दिया था। बाद में यह मामला तत्कालीन कलेक्टर संजय गोयल के सामने वर्ष 2012-13 में पहुंचा। जांच के बाद उन्होंने नजूल तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर दिया और जमीन को सरकारी घोषित कर दिया।
राजस्व मंडल ग्वालियर में लंबित है मामला

कलेक्टर के आदेश के खिलाफ फैक्टरी (Straw Board Factory) के डायरेक्टर अनवर हुसैन ने राजस्व मंडल ग्वालियर में अपील की थी। वहां से नजूल तहसीलदार के आदेश को बरकरार रखने का निर्णय दिया था। इसके बाद रतलाम जिला प्रशासन को तुरंत हाईकोर्ट में अपील करनी थी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण मामला देर से अदालत पहुंचा। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वह राजस्व मंडल के आदेश के खिलाफ पुनः राजस्व मंडल में अपील करे। फिलहाल यह मामला राजस्व मंडल ग्वालियर में विचाराधीन है।
प्रशासन की सुस्ती पर उठ रहे सवाल
स्ट्रॉ बोर्ड फैक्ट्री (Straw Board Factory) की जमीन और पलसोड़ी क्षेत्र में स्थित करीब ढाई हजार बीघा से अधिक जमीन बेहद कीमती मानी जा रही है। इतने बड़े भू-भाग को लेकर प्रशासन की धीमी कार्यवाही पर सवाल उठने लगे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते मजबूत कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो भूमाफिया फिर से कानूनी दांव-पेच के जरिए इस जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश कर सकते हैं। रतलाम (Ratlam) शहर एसडीएम और इस प्रकरण की प्रभारी अधिकारी आर्ची हरित से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।
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